राजा राममोहन राय भारत को आधुनिक भारत बनाना चाहते थे : डॉ. प्रदीप



देवघर  : राजा राम मोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के राधानगर गांव में हुआ था। अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में हासिल की थी। पन्द्रह वर्ष की आयु में उन्होंने बंगला, पारसी, अरबी और संस्कृत सीख ली थी। वे एकेश्वरवाद के एक सशक्त समर्थक थे जिन्होंने रूढ़िवादी हिंदू अनुष्ठानों और मूर्ति पूजा को बचपन से ही त्याग दिया था। मौके पर स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- राजा राम मोहन राय ने देश को आधुनिक बनाने के साथ-साथ महिलाओं के अधिकारों की भी बात की हो। इसीलिए उन्हें आधुनिक भारत की नींव रखने वाले समाज सुधारक के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने जिस आधुनिक भारत की नींव रखने की कोशिश की थी, उस दिशा में देश कुछ ही कदम आगे बढ़ पाया है। वे मूर्तिपूजा और रूढ़िवादी हिन्दू परंपराओं के विरुद्ध थे, यही नहीं बल्कि वह सभी प्रकार की सामाजिक धर्मांधता और अंधविश्वास के खिलाफ थे। उनके पिता रूढ़िवादी हिन्दू ब्राह्मण थे। छोटी उम्र में ही उनका अपने पिता से धर्म के नाम पर मतभेद होने लगा। ऐसे में कम उम्र में ही वे घर त्याग कर हिमालय और तिब्बत की यात्रा पर चले गए। जब वे वापस लौटे तो उनके माता-पिता ने उनका विवाह करा दिया। फिर भी उन्होंने धर्म के नाम पर पाखंड को उजागर करने के लिए हिंदू धर्म की गहराईयों का अध्ययन करना जारी रखा। उन्होंने उपनिषद और वेद को गहराई से पढ़ा। इसके बाद उन्होंने अपनी पहली पुस्तक ‘तुहपत अल-मुवाहिद्दीन’ लिखा जिसमें उन्होंने धर्म की वकालत की और उसके रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों का विरोध किया। आज से लगभग 200 साल पहले, जब "सती प्रथा" जैसी बुराइयों ने समाज को जकड़ रखा था, उनके जैसे सामाजिक सुधारकों ने समाज में बदलाव लाने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने "सती प्रथा" का विरोध किया, जिसमें एक विधवा को अपने पति की चिता के साथ जल जाने के लिए मजबूर करता था। उन्होंने महिलाओं के लिए पुरूषों के समान अधिकारों के लिए प्रचार किया। जिसमें उन्होंने पुनर्विवाह का अधिकार और संपत्ति रखने का अधिकार की भी वकालत की। 1828 में, उन्होंने "ब्रह्म समाज" की स्थापना की, जिसे भारतीय सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों में से एक माना जाता है। उस समय की समाज में फैली सबसे खतरनाक और अंधविश्वास से भरी परंपरा जैसे सती प्रथा, बाल विवाह के खिलाफ मुहिम चलाई और इसे खत्म करने का एक प्रयास किया। उन्होंने लोगों की सोच और इस परंपरा को बदलने में काफी प्रयास किए।

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