बच्चों की सम्पूर्ण सुरक्षा के लिए वीसीपीसी का क्रियान्वयन जरूरी!



मधुपुर /देवघर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के देवघर इकाई के तत्वाधान में कोरोना काल के दौरान बाल संरक्षण, ग्राम बाल संरक्षण समिति (वीसीपीसी) के क्रियान्वयन तथा ग्राम पलायन पंजी (वीएमआर) की महत्ता विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक मामलों तथा पर्यटन, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री हफीजुल अंसारी ने शिरकत किया। इसके साथ ही परिचर्चा में देवघर के डीसीपीओ जीतू कुमार, चाइल्ड लाइन से आभा जी, मो. इलियास जी, प्रेरणा एनजीओ से अंजनी कुमारी जी, बचपन बचाओ आंदोलन से श्याम मालिक, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक बिधान चंद्र सिंह जी, अपर्णा रवि, स्थानीय मुखिया प्रवीण कुमार, आंगनबाड़ी सेविकाएं समेत 54 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत बिधान चंद्र जी द्वारा स्वागत संबोधन से हुई जिसके बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री  हफीजुल अंसारी ने कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन द्वारा झारखंड में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान और खासकर कोरोना काल मे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर प्रकट की जा रही चिंताओं, इस दिशा में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन आदि को लेकर धन्यवाद ज्ञापन किया, साथ ही संस्था के कार्यों की सराहना भी की। उन्होंने कोरोना के संभावित तीसरे वेव के खतरे से बचने हेतु आवश्यक उपायों, सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों की भूमिकाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि खासकर गावों में कोरोना को लेकर जागरूकता की आवश्यकता है। इस दिशा में सरकार तैयार रहने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने बाल संरक्षण की दिशा में बाल ग्राम संरक्षण समिति की महत्ता को समझते हुए इसके दायित्वों व उपयोगिताओं पर बल दिया साथ ही इसे बाल संरक्षण में अहम व कारगर व्यवस्था करार दिया।  अंसारी ने केससीएफ को यह आश्वासन भी दिया कि "आपलोग अपने कार्यकर्ता के माध्यम से हमारे क्षेत्र में जागरूकता के कार्यक्रम चलाएं, इसमें जो भी सगयोग वांछित होगा, हम तैयार हैं"।

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए देवघर के डीसीपीओ जीतू कुमार ने वीसीपीसी के सुदृढ़ीकरण की जरुरत बताया । उन्होंने कहा कि वीसीपीसी के सदस्य अपनी भूमिकाओं को भली भांति समझें और अपने दायित्वओं का निर्वहन करें। यह आम दिनों में भी और कोरोना के दिनों में भी बाल सुरक्षा के लिहाज बहुत अहम तंत्र है। इसके लिए गांव, पंचायत स्तर पर जागरूकता की आवश्यकता है। 

अपने संबोधन में प्रेरणा एनजीओ से आयीं  अंजनी कुमारी ने वीसीपीसी की संरचना, इसके क्रियान्वयन के तरीके, दातित्वों व उपयोगिता आदि पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कोरोना काल मे भी बाल संरक्षण के लिए वीसीपीसी को एक मजबूत माध्यम बताया। उन्होंने आगे बताया कि वीसीपीसी बाल श्रम, बाल दुर्व्यापार, बाल विवाह तथा बच्चों के खिलाफ हो रहे सभी प्रकार के शोषण का मुकाबला करने वाली व्यवस्था है लेकिन इसके उदासीन क्रियान्वयन चिंता का विषय बना हुआ है।  अंजनी जी ने वीएमआर के माध्यम से अवैध पलायन पर काबू पाने की व्यवस्था पर भी चर्चा किया। 

चाइल्ड लाइन की आभा जी ने वीसीपीसी की मैपिंग को लेकर महत्वपूर्ण बात कही कि कागजों में तो वीसीपीसी है, लेकिन इसका क्रियान्वयन संतोषजनक नहीं रहा है। इसके जागरूकता की जरूरत है। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के झारखंड-बिहार की मैनेजर  नीपा दास ने ग्राम पलायन पंजी की संरचना, महत्ता और इसकी वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा किया इसके क्रियान्वयन हेतु जागरूकता पर बल दिया। इसके अलावा देवघर जिले में कार्यरत आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भी जमीनी स्तर पर अपने कार्यों के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन सेंट्रल टीम की मैनेजर सुश्री इशिता खाण्डका द्वारा किया गया और धन्यवाद ज्ञापन देवघर की जिला समन्वयक श्रीमती किरण कुमारी द्वारा किया गया।

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