मनरेगा कर्मचारियों को कोविड-19 से मुक्त करने के लिए सरकार को लिखा पत्र

 


देवघर झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश सोरेन ने एक पत्र लिखकर ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव आराधना पटनायक को पूरे झारखंड में मनरेगा कर्मचारियों को गैर मनरेगा कार्य सहित कोविड-19 से मुक्ति करने की मांग किए हैं उन्होंने पत्र लिखे हैं कि मनरेगा कर्मचारी अल्प मानदेय भोगी कर्मी है जिसे प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक के विभिन्न गैर मनरेगा कार्यों में लगाया जा रहा है जिससे उसके मूल कार्य पर प्रभाव पड़ रहा है आगे उन्होंने कहा है कि हमें ना कोई बीमा ना कोई भविष्य की सुरक्षा और ना ही अनुकंपा की व्यवस्था है फिर भी इस संक्रमण काल में कोविड-19 के लिए बने चेकपोस्ट, टीकाकरण केंद्र, क्वॉरेंटाइन सेंटर ,सहित संक्रमण, का खतरा वाले स्थानों पर हमारी प्रतिनियुक्ति की जा रही है जबकि इस कार्य के लिए विभागों में वेतन ,बीमा, अनुकंपा, और भविष्य सुरक्षा, से युक्त स्थाई कर्मियों के रहते हुए भी हम सबों को कार्यों में लगाया जा रहा है जो किसी भी तरह से उचित नहीं है उल्लेखनीय है कि इस महामारी में हमारे कई मनरेगा कर्मियों की कार्य के दौरान असामायिक मृत्यु भी हो चुकी है और सरकार की ओर से एक फूटी कौड़ी भी अब तक उन्हें नहीं मिला है।महेश सोरेन ने आगे कहा है कि सरकार के आदेश के बावजूद इस तरह की प्रतिनियुक्ति आदेश की घोर अवहेलना है।

आगे उन्होंने प्रधान सचिव सहित सरकार से मांग किया है कि सभी मनरेगा कर्मचारियों को covid-19 सहित गैर मनरेगा कार्यों से प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाते हुए मृत मनरेगा कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख का बीमा, हितलाभ ,अनुकंपा, की नौकरी देने की मांग की है।

इस पत्र की प्रतिलिपि उन्होंने मनरेगा आयुक्त मुख्यमंत्री राज्यपाल  सहित सभी जिला के उप विकास आयुक्त एवं उपायुक्त को ईमेल के माध्यम से पत्राचार किए हैं

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