भारत की पहली फिल्म आज से 108 साल पहले रिलीज़ की गयी थी : डॉ. प्रदीप



देवघर : भारत के सिनेमा जगत को लगभग 108 साल हो चुके हैं। भारत की पहली फिल्म आज से 108 साल पहले 3 मई 1913 को रिलीज़ की गयी थी। इस फिल्म का नाम रखा गया था राजा हरिश्चंद्र जिसे दादा साहब फाल्के ने बनाया था। दादा साहब फाल्के को फिल्म उद्योग का जनक कहा जाता हैं। उनसे पहले भारत में कभी किसी ने फिल्म शब्द का नाम भी नहीं सुना था। यह फिल्म थी क्योंकि तब तक फिल्मों के लिए ऑडियो का आविष्कार ही नहीं हुआ था। फाल्के को फिल्म बनाने की प्रेरणा 14 अप्रैल 1911 को मिली जब वे अपने बड़े भाई बालचंद्र के साथ गिरगाँव, मुंबई के एक थिएटर “अमेरिका-इंडिया थिएटर” फिल्म “अमेजिंग एनिमल” देखने के लिए गए थे। इसी साल के अंत में एस्टर के समय जब दादा साहब थिएटर फिल्म “द लाइफ ऑफ़ क्राइस्ट” देखने पहुंचे। उन्होंने फिल्मी परदे पर जीसस को देखा। उनके दिमाग में ख्याल आया कि ख़ास उन्हें फ़िल्मी परदे पर कृष्ण और राम को भी देखने का सौभाग्य मिल जाता। यही वह पल था जब दादा साहब ने यह तय कर लिया कि वह भारत में भी फिल्म बनायेंगे जो कि भारतीय संस्कृति के बारे में लोगों को बताएगी। उन्होंने फिल्म बनाने के उद्देश तय करने के बाद वह फिल्म कैसे बनाते हैं यह सिखने के लिए लंदन के लिए रवाना हुए। दो हफ़्तों का रास्ता तय करके और फिल्म बनाना सीखकर दादा साहब फिर भारत आ गए।भारत में आकर उन्होंने 1 अप्रैल 1912 को “फाल्के फिल्म” की नीव रखी। उन्होंने इस फिल्म में अभिनय करने के लिए अखबार में एक इश्तेहार छपवाया। अखबार में विज्ञापन पढकर उनके पास हजारों एप्लीकेशन आ गई। पदुरंग गढ़ाधर सने और गजानन वासुदेव वह पहले कलाकार थे जो फाल्के फिल्म से जुड़े। एक बार फिल्म की पूरी कास्ट तय होने के बाद दादर मेन रोड पर स्थित स्टूडियो पर दादा साहब ने फिल्म की शूटिंग शुरू की। पचास मिनट की इस फिल्म को शूट करने में कुल 21 दिन का समय लगा। फिल्म पूरी हो जाने के बाद 21 अप्रैल 1913 को इस फिल्म का प्रीमियर ओलम्पिया थिएटर, ग्रैंड रोड पर किया गया जहाँ पर जाने माने कुछ लोगों को न्योता दिया गया। 3 मई, 1913 को यह फिल्म आम जनता के लिए बॉम्बे कॉर्ननेशन सिनेमा, गिरगाँव में लगी। इस फिल्म से दादा साहब को जबरदस्त सफलता हाथ लगी और हजारों की जनता फिल्म देखने के लिए सिनेमा के बाहर जमा हो गयी।

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