पिता से मिली समाज सेवा और प्रकृति प्रेम की प्रेरणा: संजय भारद्वाज



देवघर : बाढ़ैं पुत्र पिता के धर्मे, खेती उपजे अपने कर्मे..... की इस कहावत को चरितार्थ किया है प्रदेश राजद के सचिव संजय भारद्वाज ने। 8 अप्रैल को अपने पिता की पुण्य तिथि पर अपने निवास पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के पश्चात मीडिया कर्मियों से मुखातिब हुए भारद्वाज  राजनीति से ऊपर समाज सेवा को तरजीह देने का श्रेय अपने पिता के  मार्गदर्शन और संस्कार को देते हैं.दुर्गा पूजा में सैकड़ों गरीब कन्याओं को नए रेडीमेड कपड़ों के वितरण और विवाह में मदद करके असहाय लोगों की उम्मीदों को जीवित रखने में उन्हें अलौकिक आनन्द महसूस होता है।

गौरतलब है कि गत वर्ष कोरोना संक्रमण के समय संजय भारद्वाज उस समय सुर्खियों में आए थे जब  अपने संसाधनों के दम पर गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा के साथ-साथ त्रिकूट पहाड़ के बंदरों और पक्षियों को दाना पानी की व्यवस्था करने में सक्रियता दिखाने के कारण तत्कालीन जिलाधिकारी नैन्सी सहाय ने इनकी सार्वजनिक रुप से प्रशंसा की थी। जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों और मरुस्थलीकरण रोकने के लिए किए गए अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए भारद्वाज कहते हैं कि वृक्षारोपण और जलसंरक्षण  लोकसेवा का माध्यम है जिससे हमारे पूर्वजों को तृप्ति मिलती है और भावी पीढ़ी को समाज और प्रकृति की सेवा की अभिप्रेरणा। इसलिए ऐसे परमार्थ के कार्यों में राजनीति को दरकिनार कर सभी को साथ आना चाहिए। 

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