छत्रपति शिवाजी को एक कुशल और प्रबल सम्राट के रूप में जाना जाता हैं : डॉ. प्रदीप



देवघर  : हमारा देश भारत वीर शासको और राजाओं की पृष्ठभूमि रहा है। इस धरती पर ऐसे महान शासक पैदा हुए है जिन्होंने अपनी योग्यता और कौशल के दम पर इतिहास में अपना नाम बहुत ही स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया है। ऐसे ही एक महान योद्धा और रणनीतिकार थे – छत्रपति शिवाजी महाराज। वे शिवाजी महाराज ही थे जिन्होंने भारत में मराठा साम्राज्य की नीवं रखी थीं। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा - शिवाजी अपने आखिरी दिनों में बीमार पड़ गये थे और 3 अप्रैल 1680 में शिवाजी की मृत्यु हो गयी थी। उन्हें एक कुशल और प्रबल सम्राट के रूप में जाना जाता हैं। उन्हें बचपन में शुरूआती शिक्षा ठीक नहीं मिल पायी थी, लेकिन वे भारतीय इतिहास और राजनीति से परिचित थे। उन्होंने शुक्राचार्य और कौटिल्य को आदर्श मानकर कूटनीति का सहारा लेना कई बार ठीक समझा था। वे एक तेज और चालाक शासक थे। वे समकालीन मुगलों की तरह कुशल थे। उन्होंने भारतीय सामाज के प्राचीन हिन्दू राजनैतिक प्रथाओं और मराठी एवं संस्कृत को राजाओं की भाषा शैली बनाया था। वे अपने शासनकाल में बहुत ही ठोस और चतुर किस्म के राजा थे। लोगो ने उनके जीवन चरित्र से सीख लेते हुए भारत की आजादी में अपना खून तक बहा दिया था। उनका जन्म 19 फ़रवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। इनके पिता का नाम शाहजी भोसलें और माता का नाम जीजाबाई था। शिवनेरी दुर्ग पुणे के पास हैं, शिवाजी का ज्यादा जीवन अपने माता जीजाबाई के साथ बीता था। वे बचपन से ही काफी तेज और चालाक थे। उन्होंने बचपन से ही युद्ध कला और राजनीति की शिक्षा प्राप्त कर ली थी। उनकी माँ उन्हें रामायण और महाभारत की प्रमुख कहानियाँ सुनाती थी जिन्हें सुनकर उनके ऊपर बहुत ही गहरा असर पड़ा था। उनकी शिवाजी शादी सन 14 मई 1640 में सईबाई निम्बलाकर के साथ हुई थीं। उन्होंने सन 1674 तक उन सारे प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था जो पुरंदर की संधि के अन्तर्गत उन्हें मुगलों को देने पड़े थे। बालाजी राव जी ने शिवाजी का सम्बन्ध मेवाड़ के सिसोदिया वंश से मिलते हुए प्रमाण भेजे थें। इस कार्यक्रम में विदेशी व्यापारियों और विभिन्न राज्यों के दूतों को इस समारोह में बुलाया था। उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की और काशी के पंडित भट्ट को इसमें समारोह में विशेष रूप से बुलाया गया था। उन्होंने कई सालों तक मुगलों के साथ युद्ध किया था। उन्होंने अपनी सेना, सुसंगठित प्रशासन इकाईयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया था।वे एक कट्टर हिन्दू थे। उनके साम्राज्य में मुसलमानों को धार्मिक आजादी थीं। वे कई मुसलमानों के मस्जिदों आदि के निर्माण कार्यो के लिये भी अनुदान देते थे। उनके द्वारा हिन्दू पंडितो, मुसलमानों, संत और फकीरों को सम्मान प्राप्त था। उन्हें अपने पिता से ही शिक्षा मिली थीं, जब उनके पिता को उस समय के सुल्तान बीजापुर के शाह के साथ संधि भी की थीं। उन्होंने अपने पिता की हत्या नहीं की अक्सर कई शासक करते हैं। उनकी गनिमी कावा नामक कूटनीति जिसमे दुश्मन पर अचानक युद्ध करके उसे परास्त किया जाता था। इस लिये शिवाजी महाराज को एक महान शासक के रूप में याद किया जाता हैं।

No comments