आज एक बार फिर मानव जाति में जन्म लेने का कर्ज उतारने का अवसर मिला।



देवघर मामला था सत्संग नगर के डॉक्टर लॉज में एक महिला का अचानक तबियत बिगड़ने से हुए निधन का मैं अपने व्यवसायिक कार्य से आज भागलपुर जा रहा था तभी रास्ते में मुझे "बंटी पांडे" नाम का एक युवक फोन करके बताया कि आप गरीबों और असहाय के लाश को सदगती पहुंचाने का काम करते हैं आज हम लोगों को आपकी सख्त जरुरत है मैंने जब विस्तार से मामले को जाना तब पता चला सत्संग नगर डॉक्टर लॉज में उमेश कुमार श्रीवास्तव के मकान में किराए पर दो बहने अपने मां अनिता कुंडू के साथ रहती थी उनके पति सिलीगुड़ी आसाम में रहते हैं माता अनिता कुंडू जो कि सत्संगी थी और आश्रम में अपना जीवन समर्पित कर यही सत्संग आश्रम देवघर में आकर अपना जीवन यापन करती थी इसी बीच उनका तबियत बिगड़ा और आज के हालात में उनका उचित इलाज समय पर नहीं हो पाया और उनका निधन हो गया ऐसे हालात में कोई उनके लिए आगे नहीं आए ना ही आश्रम से कोई आए ऐसे में जब मुझे फोन आया और मैं चुकी बाहर था मैंने अपने टीम के सदस्य राजा सिंह को तुरंत वहां भेजा और राजा सिंह ने तत्परता दिखाते हुए अपने साथियों के साथ मृतक के घर पहुंच कर मृतक की लाश को लेकर शमसान घाट पहुंचा एवं विधि अनुसार सदगति का कार्य करवाया मृतक अनिता कुंडू अपने दो पुत्रियों के साथ रहती थी पुत्रियों ने बताया कि पिता का भी तबियत काफी खराब रहता है इसलिए वह सिलीगुड़ी "आसाम "में अपना मकान में रहते हैं और माता जी सत्संग आश्रम के पास किराए के मकान में रह कर जीवन यापन कर रही थी उसकी देखभाल हेतु हमदोनों पुत्रियां यही रहा करती थी। मैं आज काफी मर्माहत हूं इसलिए कि लोग आज के वातावरण में बहुत ज्यादा भय का शिकार हो गए हैं जबकि आज ही समय में हम सभी को एक दूसरे की बहुत आवश्यकता है और सच कहता हूं की आज मृत्यु की संख्या में जो इजाफा हो रही है यह सिर्फ और सिर्फ जो भय का वातावरण है उससे ज्यादा प्रभावित हो रहा है वैसे तो सिस्टम मैं भी बहुत कमियां हैं उस कमियां को हम सब एक-एक नागरिक को जिम्मेदारी लेते हुए सामर्थ अनुसार पूरा करना चाहिए

तभी हम सब मानव जाति में जन्म लेने का जो सौभाग्य है वह पूरा होगा मैंने दोनों बच्चियों से बात कर हौसला दिया और कहा होनी को कोई टाल नहीं सकता लेकिन आप लोग हिम्मत से काम लें और जो भी इच्छाएं आपकी माता ने अपने जीवन को लेकर रखी थी उसे मरणोपरांत पूरा करने में मैं आपके साथ हूं।

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