दहेज निषेध अधिनियम 1961 के अनुसार दहेज लेने देने या इसके लेनदेन में सहयोग करने पर 5 वर्ष की कैद और ₹15000 के जुर्माने का प्रावधान है ! मुफ्ती सईद आलम!



मधुपुर 5 अप्रैल दहेज प्रथा उन्मूलन हेतु क्षेत्रीय स्तर पर एक जन जागृति अभियान चलाया गया जिसमें मुख्य रुप से गांडेय प्रखंड अंतर्गत पडरिया हटिया मैदान में 4 जिलों के लोगों का महा जुटान हुआ जामताड़ा देवघर गिरीडीह और धनबाद जिला के समाजसेवी बुद्धिजीवी शिक्षाविद एवं आंदोलनकारी पडरिया स्थित जहेज रोकथाम कार्यक्रम में पहुंचे अपने अपने जिला में प्रखंड पंचायत स्तर में जन आंदोलन चलाने का लिया संकल्प और उसी के अनुरूप दहेज प्रथा उन्मूलन हेतु कार्य का क्या जाएगा संपूर्ण रूप से बहिष्कार । उक्त बातें सामाजिक कार्यकर्ता एवं जन आंदोलनकारी मुफ्ती सईद आलम ने कही। उन्होंने कहा कि इन चारों जिलों में अन्य  कुप्रथाओं की तरह दहेज जैसी कुप्रथा चरम पर है जिससे समाज का ताना-बाना बिगड़ रहा है तथा गरीब एवं बेबस बाप को ना चाहते हुए भी अपनी गाढ़ी कमाई को बेटी की शादी में झोंक देना पड़ता है फिर भी दहेज लोभी बेटे और उसके बाप की मांगें पूरी नहीं हो पाती हैं । अंततः उसे अपनी बपौती जमीन को महाजनों के हाथों या तो गिरवी रखनी पड़ती है या हमेशा के लिए बेच देनी पड़ती है ।उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा के कुप्रचलन से बहुत सारी बेटियां अविवाहित रह जाती हैं अथवा उन्हें वेश्यावृत्ति की ओर कदम बढ़ाना पड़ता है। दहेज लोभी समाज ने ना जाने कितनी बेटियों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया है। मुफ्ती सईद ने कहा कि आए दिन बहुओं को जलाकर मार डालने अथवा उन्हें आत्महत्या पर मजबूर करने का समाचार अक्सर सुनने को मिलता है । इसका जिम्मेवार कोई और नहीं बल्कि हमारा दहेज पिशाची समाज ही है,अतः हमें समाज के हर वर्ग के बीच जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है ताकि समाज के सभी लोगों को जागृत एवं जागरूक किया जा सके और दहेज लोभी तथा अर्थ पिशाची समाज में व्याप्त दहेज प्रथा जैसी बुराई को जड़ मूल समाप्त किया जा सके । तारिक अनवर ने कहा कि अगर समाज के लोग इस कुप्रथा को खत्म नहीं करेंगे तो कानून का सहारा लिया जाएगा क्योंकि दहेज निषेध अधिनियम 1961 के अनुसार दहेज लेने,देने या इसके लेनदेन में सहयोग करने पर 5 वर्ष की कैद और ₹15000 के जुर्माने का प्रावधान है । उन्होंने कहा कि दहेज एक सामाजिक समस्या है जिसका उन्मूलन तभी हो सकता है जब हम संकल्प पूर्वक इसके विरुद्ध कदम उठाएंगे । उन्होंने कहा कि संपर्क अभियान जिला स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक चलाया जाएगा और एक सूत्रीय मिशन के तहत समाज से दहेज जैसी कुप्रथा का समापन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस मुहिम को कामयाब बनाने के लिए तीन शिखर वार्ताएं कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चारों जिले के विद्वत जनों के बीच हो चुकी हैं उक्त कार्यक्रम का संचालन फारुक फतेह तथा सफल संचालन मौलाना अब्दुल हक फैजी द्वारा अंजाम दिया गया। जिसमें मुख्य रूप से कारी यूनुस असरी हाफिज नाजिर हुसैन मौलाना हिलाल रियाजी मुखिया अब्दुल रशीद डॉक्टर अब्दुल हमीद सल्फी मास्टर उस्मान मौलाना इकबाल असली हाफिज अलाउद्दीन असरी महफूज आलम पंचायत समिति विनोद पडरिया मौलाना सरफराज कासमी शफीक रियाजी एवं अन्य मौजूद थे!

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