शिवलिंग चित्रांकन प्रतियोगिता में अनुष्का, आदित्य व साँचला अव्वल



देवघर  : स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले राष्ट्रीय स्तर 'शिवलिंग चित्रांकन प्रतियोगिता' का आयोजन देश के विभिन्न हिस्सों में रखी गई थी जिसमें लगभग 1128 प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी भागीदारी निभाई थी। प्राप्तांक के आधार पर देवघर संत फ्रांसिस स्कूल की अनुष्का सिंह को प्रथम, केन्द्रीय विद्यालय, गोड्डा के आदित्य कुमार सुमन एवं संत थॉमस स्कूल, गोड्डा की साँचला सुज्ञ को युग्म रूप से द्वितीय जबकि आर्ट एंड आर्टिस्ट, कोलकाता की प्रियशी चक्रबर्ती को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। कला के सम्बंध में विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- संसार के सभी जीवों में मनुष्य श्रेष्ठ है । उसके पास बुद्धि और विवेक के रूप में दो ऐसी नैसर्गिक शक्तियाँ हैं, जिनके कारण वह अन्य जीवों से ऊँचा उठ पाया है । आत्मरक्षा की प्रवृत्ति और प्रजनन क्षमता लगभग सभी जीवों में पाई जाती है और वे इनसे सन्तुष्ट हो जाते हैं, परन्तु मनुष्य केवल इससे ही सन्तुष्ट होकर नहीं रह जाता । सम्भवत: यही विचार कला के जन्म का मूल है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कला के सन्दर्भ में अपना मत व्यक्त करते हुए कहा है- ”अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही कला है ।” इटली के महान् विद्वान ने भी कला को अभिव्यक्ति का साधन मानते हुए कहा है- “कला का सम्बन्ध केवल स्वानुभूति से प्रेरित प्रक्रिया से है । जब कोई कलाकार स्वानुभूति को सहज, स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्त कर देता है, तो वही कला का रूप धारण कर लेती है । अत: अभिव्यक्ति की पूर्णता ही कला है… अभिव्यक्ति ही उसका सौन्दर्य है ।” विजेता अनुष्का ने कहा- ”कला, कलाकार के आनन्द के श्रेय और प्रेम तथा आदर्श और यथार्थ को समन्वित करने वाली प्रभावोत्पादक अभिव्यक्ति है ।” वास्तव में, कला सुन्दरता की अभिव्यक्ति है और समृद्धि की परिचायक है । कहा जाता है कि जिस जाति की कला जितनी समृद्ध और सुन्दर होगी, वह जाति उतनी ही गौरवशाली और प्राचीन होगी। आदित्य कुमार ने कहा- कला को किसी भी राष्ट्र की संस्कृति का मापदण्ड भी कहा जाता है । जब व्यक्ति भौतिक रूप से सुरक्षित होता है और उसे किसी बात का भय नहीं होता, तब वह मानसिक और आत्मिक सन्तुष्टि को प्राप्त करने की दिशा में प्रयासरत होता है। इस क्रम में जब उसकी अतिरिक्त ऊर्जा सौंदर्न्यानुभूति के रूप में प्रकट होती है, तो कला कहलाती है । कला निरन्तर ऊँचा उठने के प्रगतिशील विचार की परिचायक है। इसी के माध्यम से नवीन विचारों, आचार और मूल्यों का सृजन होता है। विजेता साँचला ने कहा- कला की दृष्टि से भारत बहुत समृद्ध है । भारत को विविधता का देश कहा जाता है । कला के सन्दर्भ में भी भारत में बहुत विविधता है, जो इसे संसार के अन्य सभी देशों से विशिष्ट बनाती है। भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो कृत्य, चित्रकला, हस्त कलाएँ, भित्ति चित्र, गीत-संगीत, अभिनय, साहित्य, भवन निर्माण आदि सभी कला की परिधि में शामिल किए जाते हैं ।

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