रात भर अकीदतमंद मुसलमानों ने मस्जिदों में इबादत में जुटे रहे!



मधुपुर इबादत की पर्व शबे-ए- बरात पूरे मधुपुर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में अकीदतमंद और एहतराम के साथ मनाया गया। इससे पहले मस्जिदों और कब्रिस्तान में रोशनी से सजाया गया। मुसलमान भाई पूरी रात मस्जिदों में इबादत कर कलाम पाक की तिलावत की और नवाफिल नमाज अदा की शबे-ए- बरात मुसलमानों के इबादत का पर्व है यह पर्व में खासकर कलाम पाक की तिलावत व नफील नमाज़ और अल्लाह से मागर्फत की दुआएं मांगने में गुजारते हैं। इसमें फजीलत नफिल नमाज की काफी अहमियत रखती है औरतें अपने घरों में तिलावते करती हैं मुस्लिम भाई मस्जिदों में इबादत के बाद  कब्रिस्तान में जाकर अपने पूर्वजों के लिए दुआएं मागर्फित करते है।  रब की हम्द ओ सना जरूरी है!  हर घड़ी हर जगह जरूरी है! चाहे वह कोहेतूर सीना हो! चाहे मक्का हो या मदीना हो! फर्ज लाजिम है हयात है यह! मोमिनो वह शबे- ए-बरात है यह!

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