'भारतीय महिलाओं की देन' संगोष्ठी में वक्ताओं ने रखी अभिव्यक्ति



देवघर  स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले साप्ताहिक महिला दिवस' के अंतर्गत 'भारतीय महिलाओं की देन' संगोष्ठी में स्थानीय महिलाओं ने रखी अपनी-अपनी अभिव्यक्ति। मातृ मंदिर बालिका उच्च विद्यालय की पूर्व प्रधानाध्यापिका शोभना सिंह ने कहा - भारत की स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के पहले वित्तमंत्री चिंतामणराव देशमुख की धर्मपत्नी दुर्गाबाई देशमुख किसी परिचय की मोहताज नहीं। मात्र 14 साल की उम्र में ही अपने दमदार भाषण के दम पर जिन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंनेे आंध्र प्रदेश में नारियों के उत्थान के लिए कई संस्थाओं और प्रशिक्षण केद्रों की स्थापना करवाई। समाजसेवी रीता चौरसिया ने कहा - 24 अक्टूबर 1914 को मद्रास में जन्मी कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज का हिस्सा बनकर रानी झांसी रेजिमेंट में लक्ष्मी सहगल काफी सक्रिय रही। उन्होंने दिसंबर 1984 में हुए भोपाल गैस कांड में मरीजों और पीड़ितों को चिकित्सीय सहायता प्रदान की। दन्त चिकित्सक डॉ. नीतू अग्रवाल ने कहा -'भारत कोकिला' के नाम से प्रसिद्ध सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वे आगे चलकर एक सफल कवियत्री के रूप में जानी गई। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए विभिन्न आंदोलनों में भाग लिया। मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने 1300 पंक्तियों की कविता द लेडी ऑफ लेक लिख डाली थी। गुरुकुल कोचिंग सेंटर की संचालिका, अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉ. एकता रानी ने कहा- 18 जुलाई 1961 को बिहार के भागलपुर में जन्मी कादम्बिनी गांगुली चिकित्सा शास्त्र की डिग्री लेने वाली प्रथम महिला थी। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के लिए काफी चंदा भी इक्ट्टठा किया था। उन्होंने कोयला खादानों में कार्य करने वाली महिलाओं के लिए भी आवाज उठाई। योगमाया स्मृति महिला सम्मान पुरस्कार विजेता, रिलायंस फाउंडेशन, देवघर के सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर ममता बिष्ट ने कहा- भारतीय मूल की पारसी नागरिक भीखाजी कामा को जर्मनी के स्टटगार्ट नगर में सातवीं अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस के दौरान भारतीय झंडा लहराने का श्रेय दिया जाता है। इन्हें भारतीय राष्ट्रीयता की महान पुजारिन कहा जाता है। ये जहां गई इन्होंने वहां जाकर भारतीय स्वाधीनता की अलख जलाई, और स्वराज के लिए लोगों को एकजुट किया। डॉ. चेतना भारती ने कहा- 25 जून 1908 को पंजाब के अंबाला शहर में जन्मी सुचेता कृपलानी भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थी। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रवक्ता के तौर पर भी कार्य़ किया था। सुचेता उन महिलाओं में से है जो गांधी जी के काफी करीब रही और कई आंदोलनों में उन्होंने भाग लिया और कई बार जेल की सजा भी काटी। ब्राइट कैरियर स्कूल की प्राचार्या पुष्पा सिंह ने कहा- भारत के कर्नाटक राज्य में रानी चेनम्मा का नान बड़े ही अदब से लिया जाता है। कर्नाटक के बेलगाम के पास ककती नामक गांव में जन्मी रानी चेनम्मा ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से पहले ही अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा-  अपने परिवार के 27 जनों को खोने के बाद भी रानी अहिल्याबाई होल्कर ने प्रजा औऱ सत्ता की बागडोर को बखूबी संभाला। इन्होंने अपने शासनकाल में प्रजा के हित के लिए हमेशा कार्य किया। उन्होंने सदैव अपने शासन की रक्षा के लिए सेना को अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित रखा। बच्चों और महिलाओं की स्थिति को लेकर हमेशा चिंतन करने वाली महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने सदैव नारी समाज के उत्थान के लिए कार्य किया। केरला एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी के सचिव डॉ. जय चन्द्र राज ने कहा- इल्तुतमिश की पुत्री रजिया सुल्तान मुस्लिम समाज की पहली महिला शासिका थी। रजिया प्रारंभ से ही नीति और शासन विद्या में परांगत थी, जिसके चलते उन्होंने जन कल्याण से जुड़े कई कार्यों को अंजाम दिया। प्रगतिशील लेखक संघ, देवघर इकाई के अध्यक्ष प्रो. रामनन्दन सिंह ने कहा- भारत की प्रथम शिक्षिका और समाज सुधारिका के रूप में जाने जानी वाली सावित्री बाई फूले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इन्होंने बालिकाओं के लिए अलग विद्यालय की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। गुरू महात्मा ज्योतिबा के सान्निध्य में सावित्री बाई ने विधवा विवाह कराना, छुआछुत मिटाना, दलित महिलाओं को शिक्षित करना अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बना लिया था। मानवता का संदेश देने वाली सावित्री बाई फूले का निधन प्लेग मरीजों की देखभाल के दौरान 10 मार्च 1897 को हो गया था। चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी ने कहा- देश के प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने शासन काल में सामाजिक क्रियाकलापों में काफी रुचि दिखाई। उनके समय भारत की पहचान पूरे विश्व में बनी। रीता राज, रूपा केशरी व अन्य महिलाओं ने भी अपना-अपना विचार रखा।

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