सेवा के नाम पर बेची जा रही है हजारों की आयुर्वेद दवा



देवघर-मोहनपुर प्रखण्ड अंतर्गत त्रिकुटी पहाड़ के निकट त्रिकुटांचल आश्रम के सहयोग से बसडीहा गांव में कोलकाता के आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा दो दिवसीय केम्प का आयोजन किया गया है जहां चेकअप के बाद पहुंचे मरीजों को दवा उपलब्ध करवाया जा रहा है।

विडंबना यह है कि इस जगह पर सामाजिक संगठन के नाम पर सेवा करने का मुख्य उद्देश्य से भटक कर एक कंपनी की दवा का व्यवसाय किया जा रहा है।मौके पर पहुंचे लोगों द्वारा बतौर चिकित्सक लोगों का चेक अप कर दवा भी प्रिस्क्राइब करते हैं और उन दवाओं की कीमत सैकड़ो रुपया है ।

मरीज के द्वारा खरीदे गए दवा का बील एक हजार से चार हजार रुपये तक बन रहा है और बेचारे गरीब भोले भाले ग्रामीण दवा को जरूरत की नजाकत समझते हुए खरीद भी रहे हैं ।सूत्रों की मानें तो पूर्व में सारी व्यवस्था को निशुल्क बताया गया था।

वहीं कुछ ग्रामीणों ने विरोध करते हुए कहा कि ये लोग ग्रामीण को ठग रहे हैं और दवा के नाम पर चार से पांच हजार रुपये तक दवा का मोल ले रहे हैं।वहीं मौके पर पहुंचे संस्था के एक कर्मी ने पत्रकारों के सवाल का गोल मटोल जवाब देते हुए भागते दिखे और कहा कि हमलोग दवा का विल भी देते हैं।

दरअसल स्थानीय ग्रामीण यह समझ नहीं पा रहे हैं कि यह स्वास्थ्य केंद्र कैंप निशुल्क है या इसमें शुल्क देना होगा जबकि मौके पर पहुंचे मरीजों की माने तो चिकित्सक द्वारा जांच के बाद एक हजार रुपये से 3 हजार रुपए तक की आयुर्वेद दवा दिया जा रहा है।

वहीं त्रिकुटी आश्रम के एक कर्मी ने बताया कि हम लोगों के द्वारा पहुंचे हुए लोगों को किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी जा रही है न कोई सहयोग कर रहे हैं।यहां पहुंचने से पूर्व इन लोगों ने आश्रम की किसी व्यक्ति से कोई संपर्क स्थापित नहीं किया था पर त्रिकुटा अंचल आश्रम के नाम पर यह लोग अपनी रोटी सेक रहे हैं।

बहरहाल विते दिनों एक अख़बार में इसे निशुल्क शिविर बताया गया था वाबजूद सेवा के नाम पर भोली भाली जनता को ठगने की परिक्रिया कहीं न कहीं क्राइम के दायरे में आता है।

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