हिंसा से कम नहीं है किसी को झूठा बदनाम करना: विशुद्ध सागर महाराज



देवघर. दिगंबर जैन के आचार्य   विशुद्ध सागरजी  मुनिराज अपने विहार के क्रम में 22  मुनियों के साथ 13 मार्च 2021 को देवघर पधारे। उनकेऔर मुनि ससंघ के देवघर प्रवेश पर  झौसागढ़ी स्थित  गोशाला के पास  स्वागत  हेतु देवघर  जैन समाज अन्य समाज के लोग बड़ी में संख्या महिलाएं में उपस्थित  थे। स्वागत करनेवालों में मुख्यरूप से झारखंड राज्य दिगम्बर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन, दिगंबर जैन समाज , देवघर के अध्यक्ष अजीत कुमार जैन, मंत्री सुरेश कुमार पाटनी, कोषाध्यक्ष युगल पाटनी, डॉ आनंद जैन,राजेश जैन,विनोद कुमार जैन, अशोक कुमार जैन,कमल सुराणा जय, बहादुर कोठारी, प्रमोद जैन आदि उपस्थित थे।

गोशाला के पास प्रातः ८ बजे 

मुनि संघ का स्वागत के पश्चात गाजे बाजे  के साथ देवघर जैन समाज के पदाधिकारी एवम्  सदस्यगण श्री दिगम्बर जैन मंदिर लेकर आए।  मंदिर में पूजा के उपरांत जैन सभागार में मुनिश्री आचार्य विशुद्ध सागर मुनिराज ने झारखंड राज्य  दिगंबर जैन  धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन के आवास पर आहार ग्रहण किया। मुनि ससंघ ने जैन मंदिर परिसर में आहार लिया। 

दूसरे सत्र में विशुद्ध सागर के  प्रवचन के पूर्व नारियल भेंट कर आशीर्वाद लेने वालों में देवघर पुलिस अधीक्षक अश्विनी कुमार सिन्हा, उपाधीक्षक मंगल सिंह, समाज सेवी गोविंद डालमिया, श्याम सुंदर शर्मा, डॉ राजीव पांडेय, डॉ रमण कुमार, समाजसेवी विनोद सुल्तानिया, आर सी सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार शत्रुघ्न प्रसाद, इनके अलावा आगरा, सतना, गिरिडीह, मिहिजाम, पाकुड़ , कोडरमा आदि के जैन समाज के लोगों ने आशीर्वाद प्राप्त किया।   उसके बाद दीप प्रज्वलन पुलिस अधीक्षक, उपाधीक्षक,  आर सी सिन्हा, गोविंद डालमिया आदि ने किया। पद प्रक्षालन के पश्चात अपने प्रवचन  के क्रम में विशुद्ध सागर मुनिराज जी ने धर्म का जीवन में महत्व पर बल दिया। हिंसा  तो बुरा कर्म है ही , किसी को बदनाम करना भी हिंसा के बराबर है। उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग बड़ी संख्या में भगवान बं रहे हैं। किसी के जीवन भी खुशी भरना ज्यादा ज़रूरी है। इंसान के अच्छा बुरा बनने में पर्वत से ज़्यादा उसके कर्मों का प्रभाव होता है।वरना एक ही मिट्टी से आम और इमली दोनों कैसे पैदा होते हैं। 

प्रवचन के पश्चात आचार्य श्री एवम् मुनि संघ गिरिडीह के लिए किया। उनका रात्रि विश्राम शंकरपुर में सुनिश्चित है। करक्रम का संचालन ताराचंद जैन ने किया।

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