इस्लाम धर्म दर हकीकत इंसानियत का ईल्मबरदार है जो इंसानी मोहब्बत का पैगाम सुनाया



मधुपुर 30 मार्च: हजरत सूफी शाह निजामुद्दीन अयूबी के दसवीं  उस पाक कि मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर हजरत सूफी शाह मुफ्ती मोहम्मद जाकिर हुसेन निजामी ने जलसा में उपस्थित लोगों से संबोधित करते हुए कहा हर मुसलमान भाई बहन के लिए यह जरूरी है कि इस माह बड़े ही किस्मत वाला महीना है इस माह में गफलत ना करें और इबादत में जुट जाए इसके बाद आने वाला माहे रमजान है जो बड़ा ही बरकत ओर रहमत वाला महीना होगा जिसे माहे रमजान कहे जाते हैं इस माह में भी पूरा माह इबादत में गुजारे क्योंकि बड़े ही बरकत रहमत वाला महीना है! उन्होंने कहा इस्लाम का आगाज़ आसमानी और सच्चा मजहब होने के साथ-साथ यह भी है कि वह  आलमी और आफाकी मजहब है जो किसी एक मजहब को मानने वाले या किसी कबीले के लिए नहीं है बल्कि इस जमीन पर बसने वाले हर इंसान के लिए है यही कारण है इस्लाम को एक सच्चा धर्म माना गया है! उन्होंने कहा इस्लाम धर्म अमन शांति और सलामती का पैगाम देने वाला मजहब इस्लाम है  इस्लाम धर्म दर हकीकत इंसानियत का इल्म बरदार है जो आपसी मोहब्बत और बाहमी मसावात चाहता है! उन्होंने कहा इसका सबूत यह है कि इस्लाम से पहले अरब मुल्क जहां इस्लाम का आगाज हुआ वहां का इतिहास उठाकर देखें तो इस्लाम से पहले ऐसी हालत थी के बेटा मां भाई बहन को नहीं पहचानते थे बुराई ऐसी थी के बेटे मां भाई बहन को नहीं पहचानते  रिश्ते की कोई पहचान नहीं थी ताकतवर अपने को भगवान समझते थे ऐसी खतरनाक हालत जहां इंसानियत शीसकती हुई दम तोड़ रहे थे ऐसे हालात में इस्लाम ने आपसी मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम  सुनाते हुए इंसानी जान की कदर व कीमत बताई यही इस्लाम का असल  मकसद है! इसके अलावे हाफिज व कारी हाजी फहीमउद्दीन मिस्बाही,. मौलाना मोहम्मद हकीम साहब, हाफिज शाहिद रजा ने मजहब इस्लाम पर रोशनी डाली! महफिल की शुरुआत हाफिज शाहिद रजा के तिलावत ए कुरान ए पाक से हुई महफिल का संचालन हाफिज गुलाम नूरी कर रहे थे और आधी रात तक सोराए कराम ने उपस्थित लोगों को अपने शायरी अंदाज से झुमाते रहे जो है फिरोज अंजुम; रेहान अयूबबी; मोहम्मद इश्तियाक; सरफराज आलम ;इनाम मुद्दीन इनाम; शामिल है देश की सलामती के लिए दुआएं की गई इसके बाद महफिल खत्म हुई!

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