शिवलिंग चित्रांकन प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी हुए पुरस्कृत



देवघर :  स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले पिछले दिन आयोजित राष्ट्रीय स्तर शिवलिंग चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन देश के विभिन्न शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ था जिसमें कुल 1128 नन्हें, किशोर व युवा कलाकारों ने अपनी-अपनी भागीदारी निभाई थी। प्राप्तांक के आधार पर एक सौ श्रेष्ठ स्थानाधिकारियों को पुरस्कृत किया गया। आज के कार्यक्रम में स्थानीय विजेता अपनी उपस्थिति दर्ज की। सभी विजेताओं को विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार, कला निकेतन के निदेशक मार्कण्डेय जजवाड़े, देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी, कलाप्रेमी प्रो. रामनन्दन सिंह, गुरुकुल कोचिंग सेंटर के संचालकद्वय आइआइटीयन रवि शंकर एवं डॉ. एकता रानी के करकमलों से पुरस्कृत किया गया। विजेताओं में प्रथम स्थानाधिकारी देवघर संत फ्रांसिस स्कूल की अनुष्का सिंह व गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल के अविनाश कुमार, द्वितीय स्थानाधिकारी संत थॉमस स्कूल, गोड्डा की साँचला सुज्ञ एवं केंद्रीय विद्यालय, गोड्डा के आदित्य कुमार सहित दीनबंधु उच्च विद्यालय की मौसमी मुर्मू, शिल्पा कुमारी, सतसंग कॉलेज की राजनन्दनी शर्मा, रमा देवी बाजला महिला महाविद्यालय की विद्या रानी, एकलव्य पब्लिक स्कूल की जागृति कुमारी, महिला कॉलेज, गोड्डा की वैष्णवी तिवारी, डीएवी, देवघर की आराध्या प्रिया, लिपिका कुमारी, संत थॉमस की आस्था खेतान, इंडियन पब्लिक स्कूल के निशांत कुमार, देवसंघ नेशनल स्कूल की अस्मिता हालदार, ब्राइट कैरियर स्कूल के सूरज कुमार, आशुतोष कुमार, आराध्या कुमारी, टिया श्री, आकृति कुमारी, विनीता कुमारी, सत्यम कुमार, सागर कुमार, शिवम कुमार, प्रियशी कुमारी व अन्य उपस्थित थे। मौके पर मार्कण्डेय जजवाड़े ने कहा- जीवन, ऊर्जा का महासागर है। जब अंतश्‍चेतना जागृत होती है तो ऊर्जा जीवन को कला के रूप में उभारती है। कला जीवन को सत्‍यम् शिवम् सुन्‍दरम् से समन्वित करती है। इसके द्वारा ही बुद्धि आत्‍मा का सत्‍य स्‍वरुप झलकता है। चित्रांकन में स्वर्णपदक विजेता डॉ. देव ने कहा- कला उस क्षितिज की भाँति है जिसका कोई छोर नहीं, इतनी विशाल इतनी विस्‍तृत अनेक विधाओं को अपने में समेटे, तभी तो कवि मन कह उठा- साहित्‍य संगीत कला वि‍हीनः साक्षात् पशुः पुच्‍छ विषाणहीनः। रवि केशरी ने कहा- कला में मनुष्‍य अपने भावों की अभिव्‍यक्ति करता है। कला सत्‍य की अनुकृति के अनुकृति है। डॉ. एकता ने कहा- अपने भावों की क्रिया रेखा, रंग, ध्‍वनि या शब्‍द द्वारा इस प्रकार अभिव्‍यक्ति करना कि उसे देखने या सुनने में भी वही भाव उत्‍पन्‍न हो जाए कला है। हृदय की गइराईयों से निकली अनुभूति जब कला का रूप लेती है, कलाकार का अन्‍तर्मन मानो मूर्त ले उठता है चाहे लेखनी उसका माध्‍यम हो या रंगों से भीगी तूलिका या सुरों की पुकार या वाद्यों की झंकार। प्रो. रामनन्दन सिंह ने कहा-कला ही आत्मिक शान्ति का माध्‍यम है। यह ‍कठिन तपस्‍या है, साधना है। इसी के माध्‍यम से कलाकार सुनहरी और इन्‍द्रधनुषी आत्‍मा से स्‍वप्निल विचारों को साकार रूप देता है। रवि शंकर ने कहा- कला में ऐसी शक्ति होनी चाहिए कि वह लोगों को संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठाकर उसे ऐसे ऊँचे स्‍थान पर पहुँचा दे जहाँ मनुष्‍य केवल मनुष्‍य रह जाता है।

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