माँ सरस्वती रंग भरो प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान



देवघर : स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान तथा योगमाया मानवोत्थान ट्रस्ट के युग्म बैनर तले पिछले दिन आयोजित राष्ट्रीय स्तर माँ सरस्वती रंग भरो प्रतियोगिता का आयोजन देश के विभिन्न शहरों में हुआ था जिसमें कुल 6236 प्रतिभागियों ने बढ़चढ़कर अपनी-अपनी भागीदारी निभाई थी। प्राप्तांक के आधार पर देश भर में कुल 300 प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इस कार्यक्रम में देवघर, जसीडीह, मधुपुर, गोड्डा, चकाई के लगभग 120 प्रतिभागिगण उपस्थित थे जिन्हें विवेकानंद संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, संरक्षक प्रो. रामनन्दन सिंह, संत माईकल एंग्लो ग्रुप ऑफ स्कूल्स के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जय चन्द्र राज, देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी व अन्य के करकमलों से सिद्धिविनायक बैंक्वेट हॉल में पुरस्कृत किया गया। मौके पर डॉ. देव ने कहा- वृहद् भारतीय परंपरा में ज्ञान-विद्या,नृत्य, संगीत, कला आदि की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का विशिष्ट महत्त्व है इस तथ्य का प्रमाण यह है कि भारतीय मूल के सभी धर्मों में वैदिक,जैन एवं बौद्ध आदि में सरस्वती देवी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सरस्वती हिन्दू धर्म की प्रमुख वैदिक एवं पौराणिक देवियों में से हैं। सनातन धर्म शास्त्रों में दो सरस्वती का वर्णन आता है एक ब्रह्मा पत्नी सरस्वती एवं एक ब्रह्मा पुत्री तथा विष्णु पत्नी सरस्वती। डॉ. राज ने कहा- हमारे शहर में प्रतिभा की कमी नहीं है। हम सदैव उन्हें प्लेटफार्म देने की चेष्टा करेंगे। माँ सरस्वती के सन्दर्भ में उन्होंने कहा- ब्रह्म विद्या एवं नृत्य संगीत क्षेत्र के अधिष्ठाता के रूप में नटराज शिव एवं सरस्वती दोनों को माना जाता है। इनके अन्य पर्याय या नाम हैं वाणी, शारदा, वागेश्वरी , वेदमाता इत्यादि। रवि केेशरीने कहा- माँ सरस्वती शुक्लवर्ण, शुक्लाम्बरा, वीणा-पुस्तक-धारिणी तथा श्वेतपद्मासना कही गई हैं। इनकी उपासना करने से मूर्ख भी विद्वान् बन सकता है। माघ शुक्ल पंचमी को इनकी विशेष रूप से पूजन करने की परंपरा है। रामनन्दन सिंह ने सभी विजेताओं को ढेर सारी शुभकामनाएं दी।

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