बाबा मंदिर से निकलने वाला "नीर" जल हरि के बाद हो रहा है बर्वाद



देवघर-बाबा बैधनाथ धाम मन्दिर में विराजमान महादेव के ज्योतिर्लिंग पर अर्पण किया जाने वाले जल के उपयोग को लेकर वर्तमान में कोई स्थायी योजना नहीं बनाई गई है।करोड़ों लोगों के आस्था का प्रतीक बाबा पर चढ़ने के बाद यह जल बाहर के जल कुंड में जमा होता है ।

पर इस के बाद इसका उपयोग कैसे किया जाए इसको लेकर आज तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं किया जा सका है।पहले इस कुंड में जमा होने के बाद जल मानसिंघी तालाब में बहा दिया जाता था।किन्तु भूमि गत व्यवस्था के जर्जर हो जाने के बाद यह जल नालियों वगेरह में बहने लगा।

वही पूर्व में बैधनाथ धाम मन्दिर से निकलने वाले जल "नीर"को तकनीकी सहायता से स्वच्छ कर मानसरोवर में जमा किए जाने की एक विशेष योजना बनाई गई थी जिसके तहत नीर को रिसाइकील कर इसकी ब्रांडिंग करने और देश विदेशों में रहने वाले लोगों तक पहुंचाने की योजना बनी पर वर्तमान में यह खटाई में पड़ गयी।

वहीं देवघर उपायुक्त ने इस स्थायी व्यवस्था का निरक्षण किया।वहीं डीसी ने बताया कि बाबा मंदिर के नीर से इलाके में पानी की समस्या को दूर किया जा सकता है।बर्वाद हो रहे जल को रोकने का प्रयास किया गया है अभी यह ट्रायल फेज में है बाद में इसे मानसरोवर में जमा किये जाने का कार्य किया जाएगा।

बहरहाल गर्मी में शहर के लोग पानी की किल्लत से बराबर दो चार हो रहे हैं शायद इस व्यवस्था से लोगों को पानी की समस्या से निजात मिलें वहीं डीसी साहब के इस कदम की चारो तरफ तारीफ़ हो रही है।

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