सोशल ऑडिट में मिली गड़बड़ी, जेई को लगा अर्थ दंड



सारठ : प्रखंड क्षेत्र के सभी 27 पंचायत में सोशल ऑडिट टीम द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 के तहत संचालित मनरेगा योजनाओं के भौतिक सत्यापन का सोमवार को पंचायत स्तरीय जनसुनवाई की गई। जिसमें कई पंचायतों में भारी गड़बड़ी सामने आई है। डिंडाकोली पंचायत में 46 योजनाओं में से ऑडिट टीम द्वारा 40 योजनाओं का ही भौतिक सत्यापन किया गया। टीम द्वारा बताया गया कि छह योजनाओं का समय के आभाव में सत्यापन नहीं हो पाया। वहीं मनरेगा के तहत टीसीबी योजना में काफी गड़बड़ी मिलने की बात कही गई। लाभुक आशा देवी व नसोदी बास्की के नाम से स्वीकृत टीसीबी योजना में 17 हजार रुपये कार्य से अधिक भुगतान करने की बात सामने आई। टीम द्वारा बताया गया कि अभियंता द्वारा मापी पुस्तिका में गलत बिल बना दिया है। वहीं चुनचुन देवी के टीसीबी में भी कार्य से अधिक भुगतान कर दिया है। टीम ने कहा कि जेई व कार्य का संचालन करने वाले दोषी है। वहीं आराजोरी पंचायत में 32 योजनाओं में से एक में भी सूचना पट्ट नहीं पाया गया और तीन दिन के अंदर कार्यस्थल पर सूचना पट्ट लगाने का निर्देश दिया गया। चुनरडीह के अजय सिंह व तुलसीडाबर के जुनेदा बीबी ने शिकायत किया कि उन्हें मिला बकरी शेड एक वर्ष पहले ही पूर्ण हो गया है। लेकिन लाभुक को अभी तक महज 30 हजार ही भुगतान किया गया है। वहीं सधरिया पंचायत के लकड़ाखोंदा गांव में वर्ष 2016-17 के सिंचाई कूप में 2,69,960 रुपये भुगतान कर दिया है। जबकि एमबी 18,468 रुपये का ही बनाया गया है। जेई को दोषी मानते हुए 100 रुपये का अर्थ दंड लगाया गया। फुलचुवां पंचायत में 29 मनरेगा योजना और 93 पीएम आवास योजना की जनसुनवाई हुई। कार्य स्थल पर सूचना पट्ट नही पाया गया। वहीं अभिलेख संधारण में भी गड़बड़ी पाई गई। बरमसिया आदिवासी टोला में एक भी पीएम आवास नहीं दिए जाने की शिकायत मिली। वहीं मनरेगा योजना में गलत भुगतान की भी बात सामने आई। कई अन्य पंचायतों में भी गड़बड़ी सामने आई है। अंकेक्षण टीम ने कहा कि वे खुश नहीं है। मनरेगा गाइड लाइन का पालन नहीं हुआ है। जनसुनवाई के दौरान वास्तविक मजदूर नहीं दिखे। मजदूरों के जगह पर बिचौलिए दिखे। कई योजनाओं को सुनवाई के लिए प्रखंड भेजा गया। वहीं कई जगह बिचौलिया को ही जनसुनवाई में सदस्य बना दिया गया था। जिसको लेकर ग्रामीण कई तरह की चर्चा कर रहे थे।

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