अंतर्राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता में आरव और आराध्या ने अपनी प्रविष्टियाँ भेजी



देवघर : भारतीय डाक विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। पत्र लेखन में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार जीतने का सुनहरा अवसर है। प्रतियोगिता में घर बैठे ही मात्र पत्र लिख देना है। पत्र में कोविड-19 के अपने अनुभवों को अपने परिवार के किसी सदस्य को संबोधित करते हुए लिखना है। पत्र को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी 22 भाषाओं में लिखा जा सकता है। हालांकि इसके लिए शब्द सीमा का निर्धारण स्वलिखित आठ सौ शब्द रखा गया है। वहीं इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए आयु सीमा का भी निर्धारण किया गया है। इसमें 15 वर्ष तक के बच्चे ही भाग ले सकेंगे। पुरस्कार का भी अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारण किया गया है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण, रजत व कास्य एवं प्रमाण पत्र तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण पत्र के साथ प्रथम विजेता को 50 हजार, द्वितीय को 25 हजार और तृतीय विजेता को 10 हजार रुपये पुरस्कार मिलेगा। जबकि राज्य व सर्किल स्तर पर प्रथम विजेता को 25 हजार, द्वितीय को 10 हजार व तृतीय को 5 हजार रुपये पुरस्कार मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थानाधिकारी को स्विट्जरलैंड आने जाने की टूर पैकेज भी प्रदान किया जाएगा। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए पत्र पांच अप्रैल तक हर हाल में स्पीड पोस्ट या रजिस्ट्री से पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय, डोरंडा, राँची के पता पर भेज सकेंगे। अपने शहर से गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल, भण्डारकोला के अष्टम वर्ग के परीक्षार्थी आरव कुमार एवं डीएवी जूनियर के सप्तम वर्ग की परीक्षार्थी आराध्या प्रिया ने अपनी-अपनी प्रविष्टियाँ राँची प्रेषित की। दोनों प्रतिभागियों को ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता : 2018-19 के राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार विजेता डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा, दोनों विद्यार्थियों पर उम्मीदें बनी है। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य गुम हो रही पत्र लेखन परंपरा को फिर से जीवंत करने एवं वर्तमान नई पीढ़ी की भावनाओं को कलम के माध्यम से अपनों को और करीब लाना है। पत्र लेखन सिर्फ संदेश प्रेषण का माध्यम नहीं बल्कि एक कला है, भावनात्मक अभिव्यक्ति है तथा अपनों से जुड़ने व जोड़ने का सर्वोत्तम माध्यम भी है।

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