पण्डित भीमसेन जोशी आज भी वंदनीय : डॉ. प्रदीप



देवघर  : सम्पूर्ण भारत में लोग चार फरवरी संगीत जगत के अमर स्तम्भ भीमसेन जोशी को उनकी जयंती पर स्मरण करते हैं। मौके पर स्थानीय ओमसत्यम इंस्टीट्यूट ऑफ फ़िल्म, ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा - भारतीय गायक पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी का जन्म 4 फरवरी, 1922 को हुआ था। वे शास्त्रीय संगीत के हिन्दुस्तानी संगीत शैली के सबसे प्रमुख गायकों में से एक है। उन्हें बचपन से ही संगीत का बहुत शौक था। वह किराना घराने के संस्थापक अब्दुल करीम खान से बहुत प्रभावित थे। 1933 में वह गुरु की तलाश में घर से निकल पड़े। अगले दो वर्षो तक वह बीजापुर, पुणे और ग्वालियर में रहे। उन्होंने ग्वालियर के उस्ताद हाफिज अली खान से भी संगीत की शिक्षा ली। लेकिन अब्दुल करीम खान के शिष्य पंडित रामभाऊ कुंदगोलकर से उन्होने शास्त्रीय संगीत की शुरूआती शिक्षा ली। घर वापसी से पहले वह कलकत्ता और पंजाब भी गए। उनका देहान्त 25 जनवरी 2011 को हुआ। उन्हें 4 नवंबर, 2008 को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न पुरस्कार के लिए चुना गया, जो कि भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। 'इन्हें भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सन 1985 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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