उर्दू शायरी गंगा जमुनी तहजीब और हिंदू मुस्लिम मेल मिलाप की पहचान रही है



मधुपुर 17 फरवरी सर जमीन गिरिडीह गानडे के नोपिया मैदान मैं एक शानदार गंगा जमुनी कवि सम्मेलन मुशायरा का आयोजन हाजी मोहम्मद सुलेमान साहब की अध्यक्षता में हुई मुशायरा का संचालन नौजवान शायर सरफराज अहमद चांद ने बड़े ही खूबसूरत अंदाज से अंजाम दिए मुख्य अतिथि के तौर पर झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण पर्यटन खेलकूद कला संस्कृति मंत्री जनाब हफीजुल हसन स्टेज पर जलवा अफरोज रहे सबसे पहले मुख्य अतिथि और मेहमान शायर को गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया!इसके बाद झारखंड सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने उपस्थित लोगों से संबोधित करते हुए कहा हिंदुस्तान की गंगा जमुनी मुश्तरका तहजीब की गोद में परवान चढ़ने वाली उर्दू शायरी  माजी से हाल तक अपनी इतिहास के विभिन्न जमाने में कौमी यकजहती और हिंदू मुस्लिम मेल मिलाप कि जो बुनियाद रखी है इसको हम कभी नहीं भुला सकते !उर्दू शायरी ने हमें आपसी मेल मिलाप और मोहब्बत ए वतन का दर्श दीया है जो इतिहास के पन्ने में लिखे हुए हैं जिन के नमूना ऐसे शायर की  शायरी की नज्में गजलें मैं मिलती है !मौके पर जिन सायरो और कवियों ने अपने अपने शायरी अंदाज और गजल से उपस्थित लोगों को झूमाते रहे और दाद और तहसीन की दौलत से मालामाल होते रहे वह इस तरह है1.नासिर फराज.; उड़ीसा

2. शंकर केमयूरी; पटना

3. बसंत जोशी; धनबाद

4. कैसर इमाम कैसर; गिरिडीह

5. मोईन शमसी; गांडे गिरिडीह

6. कैसर जया कैसर कैसर; मधुपुर7. ताहिर मधुपुरी; मधुपुर

8. सरफराज अहमद चांद; गिरिडीह 9.मुख्तार अहमद हुसैनी; गिरिडीह इत्यादि कवियों ने अपने अपने कलाम कलाम गजल कविता पेश किए आखिर में अध्यक्षता कर रहे अध्यक्ष हाजी सुलेमान साहब ने सभी कवियों शायरों और उपस्थित लोगों को शुक्रिया अदा करते हुए महफिल का समापन किया!

No comments