ऊंची मकान फीकी पकवान वाली कहावत सटीक बैठती सारठ सीएचसी पर एक चिकित्सक के भरोसे चल रहा है स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं रहते हैं अस्पताल कर्मी आवसीय क्वार्टर में भगवान जाने कब मिलेगा रेफरल का दर्जा और कब यहां टिकेंगे स्टाफ सहित चिकित्सक



देवघर-वैसे तो किसी भी लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र में विकास का पैमाना स्वास्थ्य शिक्षा और आवास की व्यस्था को माना गया है और यह नारा चिर काल से राजनीतिक पृष्ठ भूमि में घूम भी रही है।इसी क्रम में सारठ विधान सभा में विकास की बात करें तो कही दो राय नहीं है वर्तमान जन प्रतिनिधि ने इस कार्य को लगातार करने में लगे हुए हैं और कुछ कुछ क्षेत्रों में आवश्यकता अनुरूप विकास भी हुआ है और विकास की गाड़ी बढ़ भी रही है।

स्वास्थ्य महकमे की दृष्टि कोण से सारठ की स्थिति सबसे ज्यादा नारकीय है वर्षों पूर्व यहां एक स्वास्थ्य केंद्र हुआ करता था जिसकी भवन स्थानीय थाना के ठीक बगल में था और आवश्यकता अनुरूप व्यवस्था भी थी।किन्तु कुछ वर्ष पूर्व इस स्थान से स्वास्थ्य केंद्र को हटवा कर मुरचुरा स्थित नव निर्मित आलीशान भवन में शिफ्ट किया गया।

भवन की बनावट देख कर लोगों के मन मे एक बात चल रही थी कि हो सकता है इस अस्पताल को रैफरल अस्पताल का दर्जा मिलेगा पर हुआ कुछ भी नहीं और यह बिल्डिंग भी सिर्फ सरकारी भवन के नाम पर जगह घेरे खड़ा है।रेफरल का दर्जा नही मिलने के कारण चिकित्सको की सृजन नहीं किया जा सका बहरहाल आज भी 21वी सदी में इस अस्पताल में न एक प्रसूति रोग विषज्ञ हैं और न ही कोई ऑर्थोपेडिक और चाइल्ड स्पेसलिस्ट नतीजा आज भी गरीब गुरवे ग्रामीणों को तीन का तेरह खर्च कर देवघर या अन्य स्थानों की ओर दौड़ने को मजबूर हैं।

वहीं अस्पताल कर्मियों के लिए बनवाया गया आवासीय परिसर काफी आकर्षक और जरूरत की व्यवस्थाओं से परिपूर्ण है पर कभी भी कोई चिकित्सक यहां रुक कर नहीं रहते हैं वहीं सूत्रों की मानें तो एक मात्र चिकित्सक जो पदस्थापित है उनका भी ज्यादा ध्यान देवघर स्थित अपनी निजी क्लिनिक की ओर रहता है।

बहरहाल सारठ की जनता सरकार और विभाग के अन्य वरिय अधिकारियों से जानना चाहती है आखिर कब सुधरेगी सारठ की स्वास्थ्य व्यवस्था।

वैसे इस अस्पताल में एक्सरे मशीन भी रखा गया है पर बिजली के कटने बाद यह बन्द पड़ा रहता है पर कोई स्टाफ जैनरेटर चलवाने और चलाने की जहमत नहीं उठता है और लोग मायूस होकर लौट जाते हैं।

परिसर स्थित शौचालयों की गंदगी को देखकर मरीज और उनके परिजन उस तरफ देखते भी नहीं है और सभी खुले में शौच को मजबूर हैं?

वहीं एक अन्य चिकित्सक विधु विभोद जिन्हें सारठ सीएचसी भेजा गया था उन्हें भी समय अंतराल में देवघर बुला लिया गया जिसके कारण स्थानीय सीएचसी की व्यवस्था और लचर हो गयी है स्थानीय ग्रामीण जल्द अस्पताल में लगभग विभाग के चिकित्सको की मांग कर रहें हैं खास कर महिला चिकित्सक की जरूरत अति आवश्यक है।वहीं ड्रेसर के नाम पर सिर्फ एक स्टाफ हैं जो मल्टी पर्पस हैं यहां वहीं कहावत ठीक बैठ रही है ऊंची मकान और फीकी पकवान।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन-वहीं इस सम्बंध में देवघर सीएस एसके मेहरोत्रा ने कहा कि पूरे जिले में चिकित्सकों की घोर कमी है लगातार बैठकों में हम लोग भी इस बात को उठा रहे हैं वहीं रैफरल का दर्जा दिए जाने के सवाल पर कहा कि अभी इस पर कुछ भी कहने में मैं असमर्थ हूं जहां तक हो सकेगा सारठ अस्पताल को हर सुबिधा देनें का प्रयास करूंगा।

बहरहाल अब देखना होगा सारठ की जनता के नशीब में कब रैफरल अस्पताल लिखा है।

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