बाबा नगरी पहुंचने लगे हैं महादेव के तिलक हरूवा सरस्वती पूजा के दिन बाबा बैद्यनाथ को चढ़ेगा तिलक बाबा धुनि में रमे रहते हैं तिलक हरूवा



देवघर-वसंत पंचमी का आगमन और बसंत ऋतु की वयार अब लोगों को आहिस्ते आहिस्ते महशुश होने लगी है इसी क्रम में सरस्वती पूजा भी अब निकट है और बाबा बैधनाथ की तिलक चढ़ी भी उसी दिन होती है इसको लेकर मिथलांचल सहित अन्य जगहों के लोगों का आगमन होनें लगा है जिन्हें हम तिलखरूवा भी कहते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मिथिला वासी अपने आप को बाबा का शाला और मां गौरी का भाई बताते हुए प्रत्येक वर्ष बाबा वैद्यनाथ को तिलक चढ़ाने के लिए बाबा नगरी पहुंचते हैं और जगह-जगह पर अपनी तंबू लगाकर भजन कीर्तन में रम जाते हैं।

वहीं इस दौरान खासकर बिहार राज्य के सबसे ज्यादा श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं जो दरभंगा,सीतामढ़ी,समस्तीपुर,मुज्जफर पुर, वैशाली आदि जगहों से आते हैं वैसे कुछ तो पहुंच गए हैं और कुछ आहिस्ते आहिस्ते पहुंच भी रहे हैं। 

वैसे तो इनकी पहनावा काफी साधारण किंतु बाबा धूनी में 24 घंटा रमें रहते हैं इनके द्वारा लाए गए कांवर का रूप भी साजी नुमा होता है जिसमे वे बाबा बैधनाथ पर अर्पण करने के सामानों के साथ साथ अपने अन्य जरूरी सामानों को भी रखते हैं।

बहरहाल इनके आगमन से बाबा नगरी का माहौल काफ़ी खुशनुमा और आकर्षक हो जाता है और शहरी भी बाबा की भक्ति में लीन हो जाते हैं।

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