जनवादी लेखक संघ द्वारा झारखंड में साहित्य अकादमी गठन करने हेतु खरोटा को आठवीं भाषा अनुसूची में शामिल हैतू मुख्यमंत्री के नाम अनुमंडल पदाधिकारी के हाथों सौंपा मांग पत्र



मधुपुर जनवादी लेखक संघ द्वारा झारखंड़ में साहित्य अकादमी का गठन करने व झारखंड़ की सबसे बड़ी लोक भाषा खोरठा को 8 वीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग करते हुये मुख्यमंत्री , झारखंड़ सरकार के नाम एक माँग पत्र , अनुमंड़ल पदाधिकारी , मधुपुर को दिया गया । शिष्टमंड़ल में जलेस के प्रांतीय सह सचिव - साहित्यकार धनंजय प्रसाद , सुखदेव बर्म्मन , कैशर ज्या , अरशद मधुपुरी , जमुना रागी व आलोक गौरखपुरी शामिल थे । जलेस के प्रांतीय सह सचिव धनंजय प्रसान ने कहा कि झारखंड़ अलग राज्य के संघर्ष में राजनीतिकर्मी के साथ साहित्यकारों की भी अहम् भूमिका रही है । साहित्यकर्मियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों में जज्बा व जोशोखरोश पैदा करने का काम किया है । साहित्य सदियों से समाज व राजनीति का मार्गदर्शक रहा है । साहित्य मशाल है और वह हमेशा से समाज व देश को दिशा दिखाने का काम करता आ रहा है । झारखंड़ बने 20 साल बीत गये पर अभी तक यहां साहित्य अकादमी का गठन नहीं किया गया है , जो यहाँ के साहित्यकारों की उपेक्षा है । आज साहित्यकर्मियो व कलमकारों का सुधी लेनेवाला कोई नहीं है । ऐसे मे साहित्य अकादमी की जरूरत है । उन्होने कहा कि झारखंड़ की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा खोरठा आज उपेक्षित है , जबकि इसके साहित्य काफी समृद्ध है और करीब 70 फिसदी लोगो की बोल -चाल की भाषा है । इसलिए हम मांग करते है कि खोरठा को 8 वीँ अनुसूची मे शामिल कराये जाय व साहित्य अकादमी का गठन किया जाय!

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