युथिका बसु की याद में एक शाम रवीन्द्र संगीत के नाम



देवघर : स्थानीय पुरणदाहा निवासी स्व. युथिका बसु की स्मृति में उनके आवास पर संगीतांजलि का आयोजन किया गया। ज्ञात हो युथिका जी की मृत्यु पिछले 25 जनवरी को हुई थी। कार्यक्रम के प्रारम्भ में किशोर गायिका चिरप्रिया सरकार ने 'तोमारी गेहे' गीत की प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीत लिया। चन्दना सरकार ने ' दाड़िये आछो तुमि आमार', सुनिथ करण ने 'आमार हियार माझे, लुकिये छिले', बिपाशा दासगुप्ता ने ' तुमि की केबल ई छबि' गीत की प्रस्तुति की। कार्यक्रम में हंसध्वनि संगीत कला केंद्र के निदेशक विश्वनाथ बनर्जी, मिठू दासगुप्ता व अन्य ने भी बारी बारी से रवींद्र संगीत की प्रस्तुति की। मौके पर उनके पुत्र सह प्रगतिशील लेखक संघ, देवघर इकाई के सचिव प्रसून बसु ने स्वरचित अपनी माँ कविता की प्रस्तुति से वातावरण को शांत करने में कामयाबी हासिल की। मौके पर विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- विभिन्न विषयों को संबोधित करनेवाला रवींद्र संगीत बेहद लोकप्रिय है और बंगाली लोकाचार के लिए एक ऐसी नींव बनाता है, जो शेक्सपियर के अंग्रेजी जगत पर प्रभाव के तुलनीय और शायद उससे भी अधिक बड़ा है। कहा जाता है कि उनके गीत के 500 साल के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मन्थन के परिणाम हैं जिससे होकर बंगाली समुदाय गुजरा है। देवघर जिला विज्ञान एवं सूचना पदाधिकारी अजय वल्लभ राय ने कहा- रवीन्द्र संगीत, रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित एक संगीत विधा है, जिन्होंने सामान्य रूप से भारत और विशेष रूप से बंगाल की संगीत अवधारणा में एक नया आयाम जोड़ा। प्रगतिशील लेखक संघ, देवघर इकाई के अध्यक्ष प्रो. रामनन्दन सिंह ने हा- रवीन्द्र संगीत में स्रोतों के रूप में भारतीय शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक लोक संगीत का उपयोग किया जाता है। टैगोर ने लगभग 2230 गीत लिखे थे। कार्यक्रम में सुजय राय, अमृता राय, मोहन शर्मन, मधुगंधा बोस, अनुराधा बोस, स्मृतिकना बसु, प्रमित बसु, युथिका सरकार, अनमित्रा राय सहित दर्जनों श्रोता उपस्थित थे।

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