कोरोना अभियान को सफल बनाने के योद्धाओं में शामिल एक सारठ के एलटी मनोज मिश्रा



देवघर।विगत वर्ष बाईस मार्च से कोरोना के खौफ से पूरे विश्व सहित भारत में वैश्विक महामारी कोविड के कारण लाॅकडाउन की शुरुआत और तभी से कोरोना के इलाज में पूरे विश्व के साथ सारठ का स्वास्थ्य विभाग भी कूद पड़ा पहले कोरोना के लक्षण के मरीज का जांच हेतु स्वाब 31/03/20 को लिया गया । उसके बाद तो हर रोज जांच का सिलसिला ही चल पड़ा जो आज तक अनवरत जारी है ।अब तक के कोरोना काल में सारठ प्रखंड में कुल तेईस हजार से अधिक लोगों का कोरोना जांच किया गया जिसमें 201 लोगों का कोरोना पोजीटिव पाया गया ।मई से अगस्त तक का समय भयावह रहा ।सारठ में एक एक कर जहां थाना प्रभारी से लेकर थाना के दर्जनों कर्मचारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित प्रखंड के दर्जनों कर्मचारियों का कोरोनावायरस पोजीटिव आया ।यदि स्वास्थ्य विभाग की बात करें तो प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ जियाउल हक अपने पूरे परिवार सहित , डॉ यशोधरा नायक, लैब टेक्नीशियन ममता कुमारी, अमरज्योति सहित दर्जनों एएनएम भी कोरोना पोजीटिव हो गई । पूरा सरकारी अमला बीमार पड़ गया , पूरा देश स्थिर सा हो गया । प्रभारी सहित सभी पोजीटिव हुएकर्मचारी ठीक होने के बाद पुनः कोरोना के खिलाफ जंग में कूद पड़े ।वहीं सारठ के स्वास्थ्य विभाग का एक नाम जिसके चर्चा के बिना कोरोना अभियान और उसकी सफलता भी अधूरी रह जाएगी वह नाम है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारठ में प्रयोगशाला प्रावैधिक के पद पर कार्यरत ईमानदार और उर्जावान कर्मचारी मनोज कुमार मिश्र ।कोरोना के खिलाफ सबसे आगे आकर लैब टेक्नीशियन को ही रोगी के मुंह और नाक से जांच हेतु स्वाब लेना और जांच करना पड़ता है इस लिहाज से सबसे अधिक खतरा लैब टेक्नीशियन को ही होता है । 31/03/20 से इनके द्वारा जांच हेतु स्वाब लेना और जांच करने की प्रक्रिया जो शुरू किया गया है आज तक अनवरत जारी है । अभी भी जितने मरीज सारठ अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं इनके द्वारा सबों का कोरोना जांच हेतु स्वाब कलेक्शन किया जाता है ।जब कोरोना के कारण पूरा देश बंद हो गया , गाड़ियां बंद थी देवघर सारठ पथ टूट कर कीचड़ मय हो गया था सारठ में आवास उपलब्ध नहीं हो रहा था तब भी देवघर से हर रोज कठिन सफर तय कर आते और गांव गांव तक सारठ के सभी पंचायतों में जा जा कर कोरोना जांच किया । लगातार छह महीने तक रविवार को भी काम किया ।  पत्नी और बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें भी अपने से अलग कर दिया, लगातार छह महीने तक घर में अकेले रहे । इतने कर्मठ कर्मी को भी सरकारी उदासीनता का शिकार होना पड़ा । कोरोना काल में भी लगातार काम करते रहने के बावजूद सात महीने तक वेतन नहीं मिला फिर भी एक योद्धा की तरह अपनी सेवा भुखे रह कर भी देते रहे ।विभिन्न अखबारों में प्रमुखता के साथ वेतन के मुद्दे को उठाने के बाद आखिरकार अक्टूबर में इन्हें वेतन मिलाअलग रहने के बावजूद इनकी पत्नी बेटी और बेटा तीनों कोरोना पोजीटिव हो गए, लेकिन फिर भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पूरे परिवार को एंबुलेंस से मां ललिता अस्पताल में भर्ती कराया गया । इधर पूरा परिवार अस्पताल में जीवन और मौत के बीच झूल रहे थे और इधर ये सारठ प्रखंड के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए गांव गांव में कैम्प कर रहे थे ।आराम हराम है के अंदाज में कोरोना के खिलाफ रणभूमि में अग्रिम पंक्ति में अपना सब कुछ न्योछावर कर लड़ रहे थे।अब कोरोना की वैक्सीन भी आ गई है16/01/21 से पूरे देश सहित सारठ में भी वैक्सीनेशन की शुरुआत हो चुकी है । स्वास्थ्य कर्मियों सहित अन्य विभागों के फ्रंट लाइन कर्मियों को टीके की पहली खुराक दी गई है । कुछ दिनों में आम जनता को टीका देने की शुरुआत हो जाएगी । कोरोना का खतरा और भय भी पहले से कम हो चुका है । करीब डेढ़ महीने में सारठ में मात्र दो कोरोना पोजीटिव पाया गया है ।

सारठ में कोरोना के प्रसार को रोकने में वहां के प्रयोगशाला प्रावैधिक मनोज कुमार मिश्र का महत्वपूर्ण योगदान है। सारठ में जब भी कोरोना काल की चर्चा होगी तो आप जैसे योद्धा का नाम सम्मानपूर्वक लिया जाएगा ।

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