15 फरवरी से शुरू होगा जिले में कालाजार छिड़काव अभियान



साहिबगंज संवाददाता:--जिले में कालाजार उन्मूलन हेतु किए जाने वाले छिड़काव के लिए आंगनबाड़ी सेविका, सहिया,एवं अन्य कंर्मियों के साथ राजमहल, उधवा एवं बरहरवा प्रखण्ड के पीएचसी, सीएचसी एवं अनुमंडल अस्पताल राजमहल में बैठक आयोजित की गई।जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर 15 फ़रवरी से छिड़काव किया जाएगा। बैठक के दौरान छिड़काव के लिए सहयोग करने वाले कर्मियों से कहा गया कि कालाजार से अति प्रभावित 35  गांवों को चिन्हित कर लिया गया है। इन गांव के अलावे सभी गांव में कालाजार उन्मूलन हेतु छिड़काव किया जाना है जिसके लिए आंगनबाड़ी सेविका आंगनबाड़ी सहिया आशा वर्कर्स एवं अन्य कर्मियों की सहभागिता अति आवश्यक है। इस दौरान बताया गया कि उनके सहयोग से ही कालाजार को जिले से पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।बैठक के दौरान सभी कर्मियों को बताया गया कि जिन घरों में कालाचार उन्मूलन हेतु छिड़काव किया जाना है उसकी पूर्व सूचना दे एवं उन घरों में स्टीकर चिपकाए।

इसके तहत कर्मियों को रोज़ाना कम से कम घर घरों जाकर छिड़काव करने को कहा गया है। इसमे एक भी घर नहीं छूटे इसका ख्याल रखने को कहा गया है। इस काम में सेविका, सहियाआशा, फैसिलिटेटर व प्रखंड स्तर के कर्मियों व अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके सही कार्यान्वयन को लेकर सबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। बैठक में खासकर कोरोना को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इसके तहत कोरोना प्रोटोकॉल का अनुपालन करने की बात कर्मियों को बताई गई है। इस दौरान बताया गया की कालाजार की वाहक बालू मक्खी को खत्म करने तथा कालाजार के प्रसार को कम करने के लिए इंडोर रेसीडूअल स्प्रे (आईआरएस) किया जाता है। यह छिड़काव घर के अंदर दीवारों पर छह फीट की ऊंचाई तक होता है। कहा कि लोगों को प्रत्येक घरों में अवश्य छिड़काव करानी चाहिए, चाहे वह पूजा घर हो, बाथरूम हो या मवेशियों का स्थान। सभी जगहों पर छिड़काव कराने से कालाजार संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।बैठक में बताया गया की कालाजार एक संक्रमण बीमारी है जो परजीवी लिस्मैनिया डोनोवानी के कारण होता है। यह एक वेक्टर जनित रोग भी है। इस बीमारी का असर शरीर पर धीरे-धीरे पड़ता है। कालाजार बीमारी परजीवी बालू मक्खी के जरिये फैलती है जो कम रोशनी वाली और नम जगहों जैसे कि मिट्टी की दीवारों की दरारों, चूहे के बिलों तथा नम मिट्टी में रहती है। बालू मक्खी यही संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलाती है। इस रोग से ग्रस्त मरीज खासकर गोरे व्यक्तियों के हाथ, पैर, पेट और चेहरे का रंग भूरा हो जाता है। इसी से इसका नाम कालाजार यानि काला बुखार पड़ा ।कार्यक्रम में राज्य वेक्टर जनित रोग सलाहकार नीलम कुमार,सुनील कुमार, एमओआईसी राजमहल डॉ संजय कुमार, केअर डीपीओ अभिषेक कुमार एवं अन्य उपस्थित थे।

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