शीतलहरी और कुहासा का मार पड़ रहा है किसानों पर



देवघर-अचानक पिछले कुछ दिनों से शीतलहरी ने लगातार सारठ ग्रामीण क्षेत्रों में अपना तांडव बदस्तूर जारी रखा है जिसके कारण जहां एक ओर बच्चों और बूढ़ों को ठंड से बचाने की कवायद चल रही है तो वहीं घनी शीत और कोहरे के कारण किसानों के चेहरे की मुस्कुराहट छीन ली है।

किसानों द्वारा धान की कटाई के बाद सभी रवि फसल की खेती में भीड़ गए थे एक ओर जहां कुहासे से गहूं और सरसों को कम छती पहुंच रही है तो वहीं आलू के फसल पर इसका जबरजस्त मार पड़ा है।

सारठ प्रखण्ड के बेलबरना गांव निवासी रुबेन चन्द्र पंडित ,अर्जुन पंडित ,कमल पंडित समेत अन्य किसानो का कहना हैं कि अभी कुछ दिनों से ठंढ एवं कुहासा पड़ने की वजह से आलू का खेती मार खाता नजर आ रहा है।कुहासा पड़ने के कारण आलू की गाछ के पत्ते मुरझाते जा रहे है जिससे पौधो में बीमारी हो रही है ईस वजह से आलू जमीन पर पूरी तरह से बैठ नहीं पाता है।

ठीक इसी प्रकार अन्य सब्जीयों में भी जैसे बेगन, टमाटर,सरसो के फसल को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है। किसानों की मानें तो जहां एक ओर 44 सो रुपये क्विंटल आलू की बीज खरीद कर खेत में लगाया है वहीं अब मात्र 700 रुपये क्विंटल आलू की बिक्री हो रही है।

मौके पर किसानों का यह भी कहना था कि ठंड से गेहूं और चना की फसल को काफी फायदा होता नजर रहा है ।ज्ञात हो कि संथाल परगना प्रमंडल के किसानों की खेती पूर्णतः मौसम आधारित वातावरण पर ही निर्भर रहता है।

No comments