'गणित, विज्ञान और साहित्य का महत्व' पर वक्ताओं ने विचार रखा

 


देवघर: स्थानीय लच्छीरामका चैरिटेबल ट्रस्ट तथा साइंस एंड मैथेमेटिक्स डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के युग्म बैनर तले ट्रस्ट के कार्यालय में 'गणित, विज्ञान और साहित्य का महत्व' पर विद्वतजनों ने अपना-अपना विचार रखा। मौके पर अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में अंतरराष्ट्रीय सम्मान पुरस्कार विजेता लच्छीरामका चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक न्यासी ई. यमुना प्रसाद लच्छीरामका ने गणित के सम्बंध में कहा- गणित हमारी सभ्यता एवं संस्कृति का दर्पण है। गणित राष्ट्रीयता एवं अंतर्राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाने एवं भावना को विकसित करने में सहयोग करती है। गणित नैतिक मूल्यों सच्चाई, ईमानदारी, नेतृत्व, शुद्धता, धर्म, आत्मविश्वास इत्यादि को विकसित करती है। गणित व्यक्ति की मानसिक शक्तियों का विकास करती है। साइंस ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय सचिव सह सी. वी. रमन राष्ट्रीय शिखर पुरस्कार विजेता डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने विज्ञान के सम्बंध में कहा - विज्ञान हर नए अनुसंधान के साथ मानव जीवन को अधिक सरल बनाता चला जा रहा है। आज विज्ञान के बढ़ते चहुंओर विकास के कारण मानव दुनिया के हर क्षेत्र में अग्रसर दिखाई दे रहा है। मानव ने विज्ञान की सहायता से पृथ्वी पर उपलब्ध हर चीज को अपने काबू में कर लिया है। विज्ञान की सहायता से हम ऊंचे आसमान में उड़ सकते हैं व गहरे पानी में सांस ले सकते हैं। रेड रोज स्कूल के प्राचार्य रामसेवक सिंह 'गुंजन' ने साहित्य के सम्बंध में कहा - साहित्य समाज का दर्पण है । एक साहित्यकार समाज की वास्तविक तस्वीर को सदैव अपने साहित्य में उतारता रहा है । दीनबंधु उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक काजल कांति सिकदार ने साहित्य के सम्बंध में कहा - साहित्य ने मनुष्य की विचारधारा को एक नई दिशा प्रदान की है । सुप्रभा शिक्षा स्थली के निदेशक प्रेम कुमार ने कहा- जीवन और साहित्य का अटूट संबंध है । देवघर सेंट्रल स्कूल के प्राचार्य सुबोध कुमार झा ने विज्ञान के सम्बंध में कहा- विज्ञान के बढ़ते हुए विकास के कारण ही हम चंद्रमा से लेकर मंगल ग्रह में पहुंच पाए हैं। कोठिया विद्यालय के प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार सिंह ने साहित्य के सम्बंध में कहा - किसी भी काल के साहित्य के अध्ययन से हम तत्कालीन मानव जीवन के रहन-सहन व अन्य गतिविधियों का सहज ही अध्ययन कर सकते हैं या उसके विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बड्स पैराडाइस स्कूल, चकाई के निदेशक समीर कुमार दूबे ने विज्ञान के सम्बंध में कहा - इंधन, उपकरण आदि ऐसे साधन विज्ञान देन हैं, कि जीवन बहुत सक्रिय हो गया है । भारती विद्यापीठ के उप-प्राचार्य संजीव कुमार सिंह ने गणित के सम्बंध में कहा- गणित की उत्पत्ति कैसे हुई, यह आज इतिहास के पन्नों में ही विस्मृत है।कार्यक्रम के अंत में सभी विद्वतजनों को लच्छीरामका चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया गया एवं उपहार प्रदान किया गया।

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