* प्रेम भाई चारगी एवं प्रकृति का त्यौहार है सोहराय!



मधुपुर 03जनवरी मधुपुर महाविद्यालय परिसर स्थित आदिवासी कल्याण छात्रावास प्रांगण में संताल जुमिद गांवता व छात्रावास के संयुक्त तत्वावधान में सोहराय मिलन समारोह का आयोजन रविवार को किया गया। इस त्यौहार में मुख्यता  नए वर्ष में  नए फसल की उपज एवं पैदावार के लिए मनाया जाता है  तथा अपने सगे संबंधियों विशेषकर अपने बहन ने  को  ससुराल से मायके आने का निमंत्रण दिया जाता है।इस परंपरिक त्यौहार लगभग दो हजार वर्ष पुराने परंपरा से  बड़े धूमधाम से सामाजिक सांस्कृतिक एवं सामूहिक नृत्य के साथ एवं एकता का परिचय  देते हुए 5 दिनों तक चलने वाला त्यौहार है।  इस पर्व में पूर्वजों को स्मरण  करते हुए  गांठ  टांडी  में पूजा हर के द्वारा मुर्गा बली एवं  पशु बलि का  प्रथा  के अनुसार पूजा किया जाता है कि संस्कृत पर्व की झलक प्रत्येक आदिवासी बहुल गांव में देखा जा सकता है  इस उपलक्ष में मंचासीन पर उपस्थित मुख्य अतिथि प्राचार्य पीके राय, जेएमएम के विधानसभा प्रभारी हाफिज अल हसन व्याख्याता डॉ श्री होरन हसंदा व्याख्याता सत्यम कुमार, डीआर सोरेन, तिमोंमी  मुर्मू, हरिलाल मुर्मू, वासुदेव बेसरा,निताई सोरेन, उपेंद्र हेंब्रम, विष्णु देव मरांडी, गणेश मुर्मू, पूरण मरांडी, तथा आदिवासी कल्याण छात्रावास मधुपुर से सूरज हांसदा, दीपक किस्कु, दिल चांद, गणेश, रंजीत, सहदेव, भूदेव, शिव शंकर समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे! इस दौरान गीत-संगीत में लोग झूमे कार्यक्रम की शुरूआत आदिवासी महिलाओं द्वारा आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर किया.जिसमें गीत व संगीत, सोहराय लोक नृत्य का प्रस्तुती किया गया. ग्रामीण इलाको से आये आदिवासी समुदाय के लोगों ने भी लोक नृत्य में हिस्सा लिया.उपस्थित लोगों को संबोधित मौके पर श्री अंसारी ने कहा कि सोहराय पर्व आदिवासी समुदाय के लोग खेती के बाद खुशहाली में मनाते है. कहा कि आदिवासी समुदाय सोहराय को धुमधाम के साथ मनाते है.कहा कि भारत ऐसी भूमि है, जहां सभी जाति के लोग निवास करते है.आदिवासियों ने जल, जंगल व जमीन को संजोये रखने में अपनी भूमिका निभाते है.कार्यक्रम को सफल बनाने में सिध्दों-कान्हू,इतना अखाड़ा,आदिवासी एमेन अखाड़ा, रुनुझुन अखाड़ा जभागूड़ी,आदिवासी बुद्दिजीवी मंच,जुमीद गाँवता, सुन्दरवर्ति गांव के ग्रामीण के साथ बच्चे,बुजुर्ग,पुरूष व महिलाएं की उपस्थित लोगों ने सराहना किये!

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