'प्रतिभा पलायन को कैसे रोका जाए' पर बोले आईआईटीयन रवि शंकर



देवघर : स्थानीय साइंस एंड मैथेमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के बैनर तले आयोजित 'प्रतिभा पलायन को कैसे रोका जाए' संगोष्ठी में अपने शहर के गुरुकुल कोचिंग सेंटर के संस्थापक, भौतिकविद सह आईआईटीयन रवि शंकर ने कहा- प्रतिभा पलायन एक व्यापक शब्द है जिसका उपयोग एक देश से दूसरे देश में प्रतिभाशाली और कुशल व्यक्तियों के बसने का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यह तीन स्तरों पर होता है - भौगोलिक, संगठनात्मक और औद्योगिक। अपने शहर से ग्यारहवीं के विद्यार्थी कोटा, दिल्ली की ओर पलायन करते हैं। देवघर में भी प्लस टू स्कूलों की संख्या कम नहीं है। रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल, सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, देवसंघ नेशनल स्कूल, आर. मित्रा प्लस टू स्कूल, रेड रोज प्लस टू स्कूल, संत फ्रांसिस स्कूल, रामकृष्ण विवेकानंद विद्या मंदिर, जसीडीह पब्लिक स्कूल, एस.के.पी. विद्या विहार एवं अन्य कई शिक्षण संस्थानों में प्लस टू की पढ़ाई होती है। यहाँ, गुरुकुल, वीजीपीटी, संकल्प के साथ साथ अन्य कई कोचिंग सेंटर है जहाँ प्रति वर्ष बच्चे अच्छे अंक प्राप्त करते हैं, मेडिकल और इंजीनियरिंग भी निकालते हैं। कोटा जैसे शहर को हमारा झारखंड बिहार की आर्थिक रूप से प्रबल और समृद्ध बना रहा है, और हमारे बच्चे ही दिल्ली में रहकर के आईएएस की तैयारी करते हैं और ऑफिसर बनते हैं। हमारे यहां भी उत्तम शिक्षकों की कमी नहीं है.. अगर हमारी सरकार ध्यान दें और पढ़ाई के लिए अच्छी व्यवस्था अच्छा खाना बिजली एवं रहन-सहन बच्चों को दिया जाए तो यह बच्चे कहीं दूर जाने के बजाए अपने ही शहर में रह करके पढ़ाई करेंगे, जिससे हमारे अपने झारखंड की आर्थिक व्यवस्था में सुधार होगा एवं एक सक्षम राज्य एवं राष्ट्र का निर्माण होगा। भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के तरीकों का उद्देश्य प्रतिभा पलायन की समस्या को नियंत्रित करना है। लोगों को इस समस्या को नियंत्रित करने के तरीकों को गंभीरता से लेना चाहिए तथा सरकार और संगठनों द्वारा कार्यान्वित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत मे साइंस आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव एवं रवि की माता मारुति देवी के करकमलों से रवि शंकर को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। विगत कई वर्षों से रवि ग्यारहवीं एवं बारहवीं के विद्यार्थियों को अपने कोचिंग संस्थान 'गुरुकुल' के माध्यम बेहतर शिक्षा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं।

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