डायन कुप्रथा हमारे समाज के लिए अभिषापः-उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री



उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी  मंजूनाथ भजंत्री द्वारा जिलावासियों को जागरूक करने के उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान के साथ डायन कुप्रथा के उन्मूलन हेतु समाहरणालय परिसर से जागरूकता रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी सहिया व सेविकाओं द्वारा जागरूकता रैली भी निकाली गयी।

इसके अलावे कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि डायन कुप्रथा हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा अभिषाप है। इस कुप्रथा को दूर करने के लिए सरकार व जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से हस्ताक्षरी अभियान-सह-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया है, ताकि शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार व नुक्कड़-नाटक के माध्यम से समाज में फैले अंधविश्वास को दूर करने का काम करेगी। हम सभी जानते हैं कि भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। संस्कृत में एक श्लोक है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। हम जानते है महिलाओं का समाज निर्माण में बहुत बड़ा योगदान होता है, महिलाओं को सशक्त व स्वाबलंबी बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

 आज हम सभी देख रहे है, महिलाएं आज हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बन रही है। हमे यह स्वीकार करना होगा कि घर और समाज की बेहतरी के लिए पुरूष और महिला दोनोें समान रूप् से योगदान करते हैं। हर महिला विशेष होती है चाहे व घर पर हो या कार्यालय में। आज महिलाएं अपने आस-पास की दुनियां में बदलाव ला रही है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि बच्चों की परवरिश और घर को घर बनाने में एक प्रमुख भूमिका भी निभाती है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम उस महिला की सराहना करें और उनका सम्मान करे जो अपने जीवन में सफलता हासिल कर रही है। 

 वर्तमान युग को नारी उत्थान का युग कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी, आज हमारे देश भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपना पताका फेहरा रही है, मौजूदा सरकारें भी महिलाओं को हर क्षेत्र में अपना भविष्य निर्माण करने का अवसर उपलब्ध करा रही हैं जो महिलाओं के विकास के लिए रामबाण साबित हो रहा है।

 वर्तमान में पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली नारी किसी पर भार नहीं बनती वरन अन्य साथियों को सहारा देकर प्रसन्न होती है, यदि हम सभी विदेशी भाषा एवं पोशाक को अपनाने में गर्व महसूस करते हैं तो क्या ऐसा नहीं हो सकता कि उनके व्यवहार में आने वाले सामाजिक न्याय की नीति को अपनाएं और कम से कम अपने घर में नारी की स्थिति सुविधाजनक एवं सम्मानजनक बनाने में भी पीछे ना रहे। 

 अंत में आप सभी जिलावासियों से यही आग्रह होगा कि हम अपने जीवन में महिलाओं का सम्मान करें। भू्रण हत्या, महिला उत्पीड़न, डायन प्रथा जैसे मानसिक कुरीतियों को समाज से पूर्ण रूप से खत्म करने में अपना हर संभव योगदान सुनिश्चित करें।

■ डायन अधिनियम 2001 का नारा, डायन कहे जो वे है हत्यारा....

इसके अलावा उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री द्वारा जानकारी दी गयी कि किसी महिला को डायन कहना या उसके डायन की अफवाह फैलाना या उसे डायन कहने के लिए किसी व्यक्ति को उकसाना अथवा किसी महिला को डायन घोषित कर उसे शारीरिक या मानसिक कष्ट देना कानून जुर्म है। डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 1999 के अनुसार धारा 3 के तहत डायन का पहचान करने वाले या कहने वालो को-3 महीने की सजा या रु1000/-जुर्माना अथवा दोनों है। धारा 4 डायन बता कर किसी को प्रताड़ित कराना-6 महीना की सजा या रु 2000/-जुर्माना अथवा दोनों है। धारा 5 डायन चिन्हित करने में जो व्यक्ति उकसायेगा-3 महीने की सजा या रु 1000/- जुर्माना अथवा दोनों है। धारा 6 भूत-प्रेत झाड़ने की क्रिया-1 साल की सजा या रु 2000/- जुर्माना या दोनों का प्रावधान है एवं इस अधिनियम की सभी धाराएँ संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं एवं अजमानतीय है। 

इस दौरान उपरोक्त के अलावे जिला समाज कल्याण पदाधिकारी  अनीता कुजूर, जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी  रवि कुमार एवं संबंधित विभाग के अधिकारी, आँगनबाड़ी की सहिया व कर्मी आदि उपस्थित थे।

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