मकर संक्रांति पर गंगा घाट पर जुटी श्रद्धालुओं की भीड़,



राजमहल संवाददाता:--मकर संक्रांति के मौके पर गुरुवार की सुबह से ही विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा स्नान करने के लिए जुटी है। हालांकि कड़कड़ाती ठंड और कोहरे का असर गंगा स्नान पर भी दिख रहा है।साहिबगंज जिले में उत्तर दायिनी माँ गंगा घाट, सूर्यदेव गंगा घाट पर श्रद्धालु गंगा स्नान कर रहे हैं लेकिन इनकी संख्या बहुत ही कम है। दरअसल आज घने कोहरे के साथ-साथ कड़कड़ाने वाली ठंड भी है। जिसका असर मकर संक्रांति के गंगा स्नान पर रहा है। आज मकर संक्रांति है, ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान कर दान पूर्ण करने से सुख शांति वैभव प्राप्त होता है। इसी को लेकर श्रद्धालु सुबह-सुबह ठंड में भी गंगा स्नान करने जुटे लोग।

मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं, जानें धार्मिक:

मकर संक्रांति को खुलता है स्वर्ग का द्वार इस दिन से धरती पर अच्छे दिनों की शुरुआत मानी जाती है इसकी वजह यह है कि सूर्य इस दिन से दक्षिण से उत्तरी गोलार्ध में गमन करने लगते हैं। इससे देवताओं के दिन का आरंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्वर्ग का दरवाजा खुल जाता है। इसलिए इस दिन किया गया दान पुण्य अन्य दिनों में किए गए दान पुण्य से अधिक फलदायी होता है। भीष्म पितामाह ने चुना था आज का दिन मकर संक्रांति के दिन शुद्ध घी एवं कंबल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का दिन ही चयन किया था। गीता में बताया गया है कि जो व्यक्ति उत्तरायण में शुक्ल पक्ष में देह का त्याग करता है उसे मुक्ति मिल जाती है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं इसलिए इस पुण्यदायी दिवस को हर्षोल्लास से लोग मनाते हैं।

मकर संक्रांति : पतंग महोत्सव पर्व:

मकर संक्रांति पर्व को 'पतंग महोत्सव' के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग छतों पर खड़े होकर पतंग उड़ाते हैं। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना मुख्य वजह बताई जाती है। सर्दी के इस मौसम में सूर्य का प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवद्र्धक और त्वचा तथा हड्डियों के लिए बेहद लाभदायक होता है। पतंग है शुभ संदेश की वाहक दरअसल मान्यता है कि पतंग खुशी, उल्लास, आजादी और शुभ संदेश की वाहक है, संक्रांति के दिन से घर में सारे शुभ काम शुरू हो जाते हैं और वो शुभ काम पतंग की तरह ही सुंदर, निर्मल और उच्च कोटि के हों इसलिए पतंग उड़ाई जाती है। काम की शुभता के लिए तो कहीं-कहीं लोग तिरंगे को भी पतंग रूप में इस दिन उड़ाते हैं।


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