गणित सूत्र लिखो' प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान

 



देवघर स्थानीय साइंस एंड मैथेमेटिक्स डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन के बैनर तले पिछले दिन गणित के जादूगर श्रीनिवास रामानुजन की 100वीं पुण्यतिथि वर्ष पर वर्ग चतुर्थ से द्वादश तक के विद्यार्थियों के बीच 'गणित सूत्र लिखो' प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। देश के भिन्न राज्यों के विद्यार्थी डाक द्वारा इस प्रतियोगिता में अपनी अपनी भागीदारी निभाई  थी। देवघर के विजयी प्रतिभागियों को बरमसिया स्थित बूगी वूगी डांस एकैडमी परिसर में साइंस आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, बूगी वूगी के निदेशक जॉनी राग, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति की छात्रा सह इस प्रतियोगिता में 90 प्रतिशत प्राप्त करने वाली विजेता आयुषी अन्या व हाल में कानपुर में मॉडलिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाली सम्पा घोष के करकमलों से लगभग 52 विजयी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।



मौके पर साइंस आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय सचिव सह श्रीनिवास रामानुजन राष्ट्रीय शिखर पुरस्कार विजेता डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- गणित ऐसी विद्याओं का समूह है जो संख्याओं, मात्राओं, परिमाणों, रूपों और उनके आपसी रिश्तों, गुण, स्वभाव इत्यादि का अध्ययन करती हैं। गणित एक अमूर्त या निराकार और निगमनात्मक प्रणाली है। गणित की कई शाखाएँ हैं : अंकगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, बीजगणित, कलन, इत्यादि। गणित सीखना हर विद्यार्थियों के लिए अत्यावश्यक है।



जॉनी राग ने कहा- गणित कुछ अमूर्त धारणाओं एवं नियमों का संकलन के साथ साथ दैनिक जीवन का मूलाधार है। यह सभी विज्ञानों की रानी है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। भौतिकी, रसायन विज्ञान, खगोल विज्ञान आदि गणित के बिना नहीं समझे जा सकते। ऐतिहासिक रूप से देखा जाय तो वास्तव में गणित की अनेक शाखाओं का विकास ही इसलिये किया गया कि प्राकृतिक विज्ञान में इसकी आवश्यकता आ पड़ी थी। गणित की उपयोगिता दिनोदिन बढ़ती जा रही है।



आयुषी अन्या ने कहा- यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा, तथा वेदांगशास्त्राणां गणितं मूर्ध्नि स्थितम् अर्थात जिस प्रकार मोरों में शिखा और नागों में मणि का स्थान सबसे उपर है, उसी प्रकार सभी वेदांग और शास्त्रों मे गणित का स्थान सबसे ऊपर है। संगीत में स्वरग्राम व संनादी एवं प्रतिबिंदु के सिद्धांत गणित पर ही आश्रित होते हैं। गणित का विज्ञान में इतना महत्व है व विज्ञान की इतनी शाखाओं में इसकी उपयोगिता है कि गणितज्ञ एरिक टेम्पल बेल ने इसे ‘विज्ञान की साम्राज्ञी एवं सेविका’ की संज्ञा दी है। 



विजेता गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल के षष्ठ वर्ग की छात्रा आराध्या प्रिया ने कहा-किसी भौतिकविज्ञानी के लिए अनुमापन तथा गणित का विभिन्न तरीकों का बड़ा महत्व होता है। पुरातन काल से ही सभी प्रकार के ज्ञान-विज्ञान में इसका स्थान सर्वोपरि रहा है। व्यवसाय और उद्योगों से जुड़ी लेखा संबंधी संक्रियाएं गणित पर ही आधारित हैं। बीमा संबंधी गणनाएं तो अधिकांशतया ब्याज की चक्रवृद्धि दर पर ही निर्भर है। जलयान या विमान का चालक मार्ग के दिशा-निर्धारण के लिए ज्यामिति का प्रयोग करता है।



सांदीपनि पब्लिक स्कूल की छात्रा बरखा केशरी ने कहा- उच्च गतिवाले संगणकों द्वारा गणनाओं को दूसरी विधियों द्वारा की गई गणनाओं की अपेक्षा एक अंश मात्र समय के अंदर ही सम्पन्न किया जा सकता है। इस तरह कम्यूटरों के आविष्कार ने उन सभी प्रकार की गणनाओं में क्रांति ला दी है जहां गणित उपयोगी हो सकता है। जैसे-जैसे खगोलीय तथा काल मापन संबंधी गणनाओं की प्रामाणिकता में वृद्धि होती गई, वैसे-वैसे नौसंचालन भी आसान होता गया।



विजेता एकलव्य पब्लिक स्कूल की छात्रा आँचल कुमारी ने कहा- कुछ हद तक हम सब के सब गणितज्ञ हैं। अपने दैनिक जीवन में रोजाना ही हम गणित का इस्तेमाल करते हैं - उस वक्त जब समय जानने के लिए हम घड़ी देखते हैं, अपने खरीदे गए सामान या खरीदारी के बाद बचने वाली रेजगारी का हिसाब जोड़ते हैं या फिर फुटबाल टेनिस या क्रिकेट खेलते समय बनने वाले स्कोर का लेखा-जोखा रखते हैं।



विजेता मातृ मंदिर बालिका उच्च विद्यालय की छात्रा मानसी कुमारी शर्मा ने कहा- मानव ज्ञान की कुछ प्राथमिक विधाओं में संभवतया गणित भी आता है और यह मानव सभ्यता जितना ही पुराना है। मानव जीवन के विस्तार और इसमें जटिलताओं में वृद्धि के साथ गणित का भी विस्तार हुआ है और उसकी जटिलताएं भी बढ़ी हैं। सभ्यता के इतिहास के पूरे दौर में गुफा में रहने वाले मानव के सरल जीवन से लेकर आधुनिक काल के घोर जटिल एवं बहुआयामी मनुष्य तक आते-आते मानव जीवन में धीरे-धीरे परिवर्तन आया है।


विजेता माउंट लिटेरा जी स्कूल के छात्र युवराज सिंह ने कहा- क्रिस्टोफर कोलम्बस और उसके परवर्ती काल से मानव सुदूरगामी नए प्रदेशों की खोज में घर से निकल पड़ा। साथ ही, आगे के मार्ग का नक्शा भी वह बनाता गया। गणित का उपयोग बेहतर किस्म के समुद्री जहाज, रेल के इंजन, मोटर कारों से लेकर हवाई जहाजों के निर्माण तक में हुआ है। राडार प्रणालियों की अभिकल्पना तथा चांद और ग्रहों आदि तक राकेट यान भेजने में भी गणित से काम लिया गया है।

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