वीरता अदम्य साहस और शौर्य की कुर्बानी की दास्तां है सेना दिवस :डॉ. प्रदीप



देवघर : आज सम्पूर्ण भारत में सेना दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। मौके पर विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थल सेना की वीरता अदम्य साहस और शौर्य की कुर्बानी की दास्तां को बयान करता है। यह दिवस भारत में हर वर्ष 15 जनवरी को लेफ्टिनेंट जनरल के. एम. करियप्पा के भारतीय थल सेना के शीर्ष कमांडर का पदभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश राज के समय के भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर से यह पदभार ग्रहण किया था। यह दिन सैन्य परेडों, सैन्य प्रदर्शनियों व अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के साथ नई दिल्ली व सभी सेना मुख्यालयों में मनाया जाता है। इस दिन उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी भी दी जाती है जिन्होंने कभी ना कभी अपने देश और लोगों की सलामती के लिये अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया। आज हर 

सैनिक गर्व से कहता है-

भारत माता के शीश मुकुट की शान हूँ मैं,

करोडों भारतीयों का अभिमान हूँ मैं।

वैसे तो बहुत दयावान हूँ मैं,

पर दुश्मन की मौत का सामान हूँ मैं।

माँ भारती की रक्षा में प्राण न्यौछावर करता,

देश का वीर जवान हूँ मैं।


एक माँ से दूर हूँ तो एक मां के पास हूँ मैं।

हर देशवासी की सुरक्षित रहने की आस हूँ मैं।

दुश्मन के दिल में भरता त्रास हूँ मैं,

भारत माँ के चरणों में शीश नवाता एक दास हूँ मैं।

दुश्मन के विफल करता हर प्रयास हूँ मैं,

हर एक भारतवासी का अखण्ड विश्वास हूँ मैं।


बस तू रो मत माँ, दूर होकर भी तेरे आसपास हूँ मैं,

जानता हूँ तेरे लिए सबसे ख़ास हूँ मैं।

माँ बस उदास ना हो मैं वापिस जरूर आऊंगा,

तुझसे किया जो वादा उसे निभाऊंगा।

ज़िंदा ना सही तिरंगे में लिपटा लाया जाऊंगा,

पर वादा है तुझसे मैं वापिस जरूर आऊंगा।

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