झारखण्ड राज्य अनुबंध कर्मचारी महासंघ ने स्वामी विवेकानंद की 158वीं जयंती मनाई



झारखण्ड राज्य अनुबंध कर्मचारी महासंघ के अनुसंगी इकाई झारखण्ड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने स्वामी विवेकानंद की 158 वीं जयंती देवघर जिले के कौरौं ग्राम में मनाई गई ।इस अवसर पर संघ ने स्वामी जी के प्रतिमा पर माल्यर्पण कर उनके बताए रास्ते पर संकल्प लिया ।

धर्म ,अध्यात्म,दर्शन औऱ ज्ञान के अद्वितीय संगम थे स्वामी जी :- सुशील 

स्वामी विवेकानंद  भारतीय दर्शन के प्रथम अध्याय के रूप में भारतीय जनमानस में विराजमान है  शिकागो धर्म सम्मेलन में अपने देश की विरासत को स्थापित कर पूरी दुनियां को यह स्वीकार करना पड़ा कि भारत का एक सन्त जब इतना बड़ा विद्वान और ज्ञाता है तो संतो का देश मे ऐसे अनेक विभूतियां होंगें जो भरतीय दर्शन को स्थापित करने में कामयाब हैं ।इनकी सृजन शैली वक्तव्य औऱ बोले गए हर बात एक नीति वाक्य बन चुका है ।देश बढ़ते भौतिकवादी प्रभाव को रोकने के लिए इनके दर्शन को विद्यालय विश्व विद्यालय  के पाठ्यक्रम में शामिल कर युवाओं में चेतना का संचार किया जा सकता है ।


मानव सेवा के प्रतीक थे स्वामी जी :- डॉ राजेश 

स्वामी जी का सेवा भाव मानवता के लिए समर्पित था ।दिन दुःखियों की पीड़ा हरण वे बिना किसी जातिगत भेदभाव से करते थे  ।इनकी इस खासियत का 1%भी समाज सेवा से जुड़े लोग यदि अनुसरण  कर लेते तो संसार का कोई दीन दुखी असहाय नही होता ।

कार्यक्रम को सुरेश किस्कू ,रतन दास दिगम्बर सिहं सहित कई अनुबन्ध क्रर्मियों ने सम्बोधित कर स्वामी जी के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया ।

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