जलसे में बोले उलेमा : हिन्दू हों या मुसलमान हमें एक दूसरे के धर्म व भावनाओं का करना चाहिए सम्मान



सारठ : प्रखंड क्षेत्र के सधरिया पंचायत के कालीजोत गांव में बीते गुरुवार की रात्रि को एक दिवसीय जलसा जश्ने गोसे आजम दस्तगीर का आयोजन किया गया। जिसमें कई नामचीन उलेमाओं ने शिरकत की और सभी उलेमाओं ने एक से बढ़कर एक तकरीर प्रस्तुत किया। मौलाना अलहाज सलाउद्दीन निजामी, जमशेदपुर ने आपने तकरीर में कहा के गोसे आजम ऐसे पीर थे जो ईशा के वजु से फर्ज की नमाज चालीस वर्षों तक पढ़े थे। जलसे का आगाज हाफीज हिदायत अली के द्वारा और जलसे का सदारत हाजी मौलाना रफीक नुरी के द्वारा की गई। वहीं जलसे की नेकाबत मौलाना शेखावत हुसैन, नसीम अख्तर फैजी सारठ और फरीद शमशी, नसीरुद्दीन दिलशाद नात के द्वारा पढ़ी गई । जलसे में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से आये पीरे तरीकत शैयद शैफुल हसन बोखारी ने कहा की मिल्लत सबसे बड़ी चीज है और हमारा इस्लाम धर्म हमेशा हमें भाई-चारे और सच्चाई का रास्ता अख्तियार करने का पैगाम देता है ।उन्होंने कहा कि हिन्दू हो या मुसलमान, हमें हमेशा एक-दुसरे का धर्म और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। कार्यक्रम को सफल बनाने में हाफीज सद्दाम, मौलाना नसीरुद्दीन, हदीस अंसारी समेत अन्य कईयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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