एसपी माइंस चित्रा कोलियरी के क्वार्टरों में कचरे का अंबार



देवघर चित्र एसपी माइंस चित्रा कोलियरी के क्वार्टरों में इन दिनों कचरे का अंबार पड़ा है। कचरा प्रबंधन के लिए कोलियरी द्वारा हर साल  निविदा दी जाती है। जिसमें करीब 10 लाख रुपया से अधिक का सालाना खर्च कचरा साफ करने के लिए सिविल विभाग द्वारा ठेकेदार को दिया गया है। लेकिन कॉलोनियों की हालत देखकर लगता नहीं है कि कभी भी सही रूप से साफ सफाई की जाती है, और लाखों रुपया का बंदरबांट किया जा रहा है। कोलियरी कर्मचारी, मजदूर, श्रमिक गंदे नालों और कचड़ों के बीच रहने को विवश हैं। जब कभी भी मजदूरों द्वारा आवाज उठाई जाती है ठेकेदार द्वारा खानापूर्ति कर मुख्य सड़कों पर झाड़ू आदि लगाकर बील उठा लिया जाता है। झारखंड मुक्ति मोर्चा केंद्रीय समिति सदस्य राम मोहन चौधरी ने कहा की कोरोना महामारी अभी तक गया नहीं है । साफ सफाई बहुत जरूरी है। ऐसे में सरकारी राजस्व का दुरुपयोग और कोलियरी के मजदूरों श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोलियरी प्रबंधन पिछले कुछ दिनों से केवल कोयला प्रोडक्शन और डिस्पैच करने में ही व्यस्त है मजदूरों के वेलफेयर की कोई चिंता प्रबंधन को नहीं है। जबकि कोल माइन्स एक्ट में मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए वेलफेयर विभाग बना हुआ है। जिसका काम दिन रात कोलियरी में काम करने वाले मजदूरों के लिए आवास, पानी , बिजली साफ-सफाई ,स्वास्थ्य, शिक्षा की जिम्मेदारी होती है लेकिन चित्रा में इन सबों से प्रबंधन को कोई मतलब नहीं है।

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