केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक कई लोक लुभाने योजनाएं चलाए जा रहे हैं । योजनाएं के केंद्र में राज्य के गरीब हैं



गोड्डा जिले में 70 साल बाद में देश में गरीबों को धुलावता के साथ योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है । इस दौरान सरकार गरीबी हटाओ से लेकर आत्मनिर्भर भारत तक का सफर तय किया।  लेकिन आज भी अंतिम पेयदान पर बैठे व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचा है । इसका जीता जागता उदाहरण गोड्डा जिला  बसंतराय प्रखंड के सुस्ती पंचायत जो जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर गांव महेशपुर के रमन कुमार साह जो पिछले कई वर्षों से प्लास्टिक तिरपाल के नीचे अपने पत्नी व दो बच्चों के साथ  जीवन जी रहे हैं । लेकिन आज तक इन्हें किसी सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिला। यूं तो महापुरुषों के नाम से सरकार आदिवासी व गरीब के लिए आवास योजना संचालित किये हैं । रमन कुमार साह के हालात देखकर आवास योजना के लिए जो मापदंड तय किए गये हैं । उन सब पर सवाल उठाना लाजिमी है। क्योंकि रमन कुमार साह ने कई बार मुखिया से गुहार लगाई लेकिन नतीजा सिफर रहा। पिछले कई वर्षों से सर्दी गर्मी बरसात इसी तिरपाल के नीचे रमन कुमार साह ने अपना जीवन गुजार रहे हैं लेकिन अभी भी सरकार से उनकी उम्मीदें और हौसला कम नहीं हुए हैं । कभी कड़ाके की ठंड तो कभी आंधी तूफान तो कभी बारिश तो कभी सांप बिच्छू का डर लेकिन रमन कुमार साह के  सहारे के रूप में ये तिरपाल । अब देखना सरकार को हैं क्या सहारे के रूप में सरकार उसे छत देगी या रमन कुमार साह  को भी वह नसीब नहीं होगा ।

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