इंसान माशरे मैं पैदा होता है और इसी में जीता और मरता है! मगर कुछ लोग अपनी हयाते जिंदगी में ऐसी छाप छोड़कर चले जाते हैं जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता



मधुपुर 12 नवंबर झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण एवं निबंधन विभाग मंत्री रहे सर्व हाज़ी हुसैन अंसारी के चालीसवां के मोके पर मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो वसल्लम व दूवाओं का महफिल मधुपुर विधानसभा क्षेत्र के मार्गोमुंडा प्रखंड के पिपरा पैतृक गांव में मरहूम की याद  में महफिल आयोजन की गई !इस मौके पर शहर के नामी-गिरामी उल्लमा ए कराम व शोरा ने शिरकत की! जिसमें हजरत मौलाना मोहम्मद जाकिर हुसैन, हजरत मौलाना फारूक अहमद, आसिफ इकबाल,हबीबुल्लाह फैजी, जावेद अख्तर फैजी, उपस्थित थे महफिल का आगाज कुराने पाक की तिलावत से की गई इसके बाद बारी बारी सोरा ए कराम ने नाते रसूल पेश किए। इसके बाद हजरत मौलाना मोहम्मद जाकिर हुसैन ने अपने संबोधन में कहा इंसान माशरे में पैदा होता है और इसी में जीता और मरता है अरस्तु ने इसे एक माशरती जानवर कहा है जो मां की आगोश से लेकर लहद की आगोश तक इसकी जिंदगी माशरे के विभिन्न इलाको और परांतो मैं जकड़ी हुई है! उन्होंने कहा मगर अल्लाह ताला ने दुनिया में कुछ ऐसे इंसान को पैदा किए हैं जो दुनिया में अपनी हयाते जिंदगी मैं ऐसी छाप छोड़कर इस दुनिया से रुखसत हो जाते हैं और अल्लाह के प्यारे हो जाते हैं जिसे दुनिया याद करती है इसमें हमारे हर दिल अजीज रहनुमा सर्व हाजी हुसैन अंसारी कि शख्सियत भुलाया नहीं जा सकता है इस शख्सियत में हाजी हुसैन अंसारी मरहूम का नाम काबिले जिक्र में शामिल है मरहूम ऐसी शख्सियत का मालिक थे जिसमें परहेज गारी इमानदारी और इंसानियत कूट-कूट कर भरा हुआ था अल्लाह ताला मरहूम को करवट करवट जन्नतुल फिरदोस में जगह नसीब अता फरमाए!  आमीन. सुम्मा आमीन! इसके अलावा मौलाना मोहम्मद फारूक अहमद ने भी मरहूम की शख्सियत और उनकी परहेज गारी पर रोशनी डाली आखिर में मरहूम के मगफिरत के लिए इजतमाई दुआ की गई ! मौके पर हाजी मोहम्मद शोएब साहब,हाजी अब्दुल रशीद साहब, हाफिज उल हसन, शब्बीर अंसारी,मोहम्मद इकराम अंसारी,  तनवीर हसन,मुखिया मोहम्मद कलाम,मोहम्मद नईम,मोहम्मद  समीर आलम समेत सैकड़ों लोग उपस्थित रहे!

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