सैदापुर में जगद्धात्री पूजा की तैयारी सुरु नहीं लगने देगा इस बार भक्त्तों कि भीड़



गोड्डा: सदर प्रखंड के सैदापुर गांव में मां जगधात्री पूजा की तैयारी अंतिम चरण में है।रविवार को मां जगधात्री मंदिर में स्थापित प्रतिमा को प्राण प्रतिष्ठा देने के उपरांत मंदिर के कपाट भक्तों को लिए खुल जायेंगे जबकि सोमवार को मां की त्रिकाल पूजा होगी। इधर पूजा को लेकर आयोजन समिति जोरशोर से तैयारी में जुटी है। बाका से जल कर आए सुबल मूर्तिकार प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हैं। सैदापुर में मां जगधात्री पूजा का भव्य आयोजन होता था पर इस बार कोविड-19 को लेकर कुछ सुस्त सा पड़ गया है कमिटी के सदस्य ने बताया कि इस बार भक्त्तों की भीड़ इकट्ठा नही होने दिया जाएगा वहीं दुकानदारों को भी हर बार की तरह मंदिर के सामने नही लगाने दिया जसएगा मंदिर से तकरीबन 100 फिट दूरी पे सिर्फ बतासा वाला को लगाने दिया जाएगा । सैदापुर में  लगभग 120वर्षो से मां जगधात्री कि पूजा होती आ रही है। दिनों दिन श्रद्धालुओं कि भीड़ बढ़ती ही जा रही है। पूजा समारोह में सदर प्रखंड क्षेत्र के अलावा बड़ी संख्या से जिला मुख्यालय से लोग माता के दर्शन के लिए सैदापुर आते है। वही इससे सटे बिहार के बांका जिला व आसपास के इलाकों के लोग मां जगधात्री के दर्शन के लिए सैदापुर आते है। मां जगधात्री को पुत्रदायिनी माता भी कहा जाता है। जानकारी के अनुसार सैदापुर के अधिवक्ता हीरालाल कोलकाता में वकालत के लिए गये थे जहां उन्होंने मां जगधात्री कि पूजा होते देखी। इसके बाद उन्होंने मां जगधात्री से पुत्र रत्न की कामना की। जहां उन्हें पुत्र रत्न कि प्राप्ति हुई। इसमें दो पुत्र कमलाकांत झा व विमलाकांत झा हुए। इसके बाद से सैदापुर गांव आकर 1901 में पहली बार मां जगधात्री कि पूजा की । तब से लेकर आजतक यहां मां जगधात्री की पूजा अर्चना श्रद्धाभक्ति से होती आ रही है। तीन दिनों से तक चलनेवाले पूजन समारोह में पूरा गांव मां कि भक्ति में डूबा रहता है। दूर दराज व दूसरे प्रदेश में रहनेवाले लोग भी मां कि पूजा में गांव आते है। जहां लगभग हर घर में रिश्तेदार भी मां के दर्शन व पूजा अर्चना के लिए आते हैं। दिनों दिन मां के प्रति आस्था बढ़ती ही जा रही है।पंडित जी नवल किशोर झा ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले पूजन समारोह 22नवम्बरअष्टमी तिथि से होगी। जहां मां के पट भक्तों के लिए खुल जायेंगे। जबकि  23नवम्बर को मां की त्रिकाल पूजा होती है व बलि प्रदान कि जाती है। दशमी को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं।वही एवं प्रधान विष्णु कांत झा कमिटी सदस्य संतोष झा,शिशिर झा,राजीव झा,संजीव झा,गोपाल झा और सरोज कांत झा

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