नए राशन कार्ड बनाने के नाम पर जिला खाद्य आपूर्ति कर्मचारी की मिली भगत से अवैध वसूली



देवघर लॉकडाउन और अनलाँक में झारखंड के लोगों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी डिलर और मुखिया को दी गई है।थी उनके माध्यम से जरुरतमंद लोगों की सूची राज्य सरकार के पास भेजे गई जिससे लोगों को राशन मिल पा रहा है । वहीं देवघर जिले पालोजोरी प्रखण्ड के कचुवासोली पंचायत में डिलर सहदेव प्रसाद मंडल के पोते जन वितरण प्रणाली के कार्ड बनाने के नाम पर वसूली डिलर की भूमिका में हैं। दरअसल, डिलर के पोते राजा मंडल पर जन वितरण प्रणाली के कार्ड बनाने के नाम पर गरीबों से अवैध वसूली करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि पालोजोरी प्रखण्ड के कचुवासोली पंचायत में लोगों से डिलर सहदेव प्रसाद मंडल के पोते राजा मंडल खुलेआम राशनकार्ड बनाने के नाम पर 1000-500रुपए वसूली कर रही हैं। जिसका ओडियो  भी वायरल हो रहा वहीं तर्क ये दिया जा रहा है कि वो कागज से जुडे खर्च के लिए रुपए ले रही हैं। जब पंचायत के मुखिया ने राशनकार्ड धारी को रूपया देने से मना किया तो डिलर के पोते ने उन्हे धमकी और गाली ग्लोज भी किया और कहा कि हम आपके वोट बैंक को बर्वाद कर देगे पंचायत मे सभी का राशन कॉर्ड मात्र 200रूपया मे ही बना देगे जिसका कि ओडियो रिकोडिंग भी है 

और ओडियो मे साफ तौर पर कहा जा रहा कि आँफिस मे खर्च लगता है तब ही कार्ड तुरंत बन जाता है 

वहीं जिला  खाद्य आपूर्ति आंँफिस के पदाधिकारी  इसे गलत बताते हुए  इसकी जानकारी नही होने की बात कर रही और यह भी कह रही है कि अगर इस तरह का मामला सच मे हुआ है तो कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं। बता दें कि झारखंड सरकार लॉकडाउन की मार झेल रहे गरीबों की हर संभव मदद कर रही है। लोगों को आसानी से राशन पहुंचाने के लिए मुखिया और डीलर  का काम काफी सराहनीय है। ऐसे में कुछ डिलर के द्वारा की जा रही वसूली पर ग्रामीणों ने सख्त कार्रवाई की मांग की  राशनकार्ड गरीब तबके के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके द्वारा ही उन्हें प्रतिमाह कम दामों में राशन  प्राप्त होता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पुरे राज्य में नए राशनकार्ड बनाने शुरू किए गए तो उन लोगों को उम्मीद जगी, जिनके पास अभी तक राशनकार्ड नहीं थे। उन्हें लगा कि अब उनके भी राशनकार्ड बन जाएंगे। लेकिन सरकारी कर्मचारियों और कुछ डीलर  दलालों की मिलीभगत गरीबों पर भारी पड़ रही है। देवघर कार्यालय में कर्मचारी लक्ष्य पूरा होने की बात कह कर उन्हें टरका देते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में दलाल अवैध वसूली कर राशन कार्ड बनवा रहे हैं।  जिला पूर्ति विभाग अब लक्ष्य पूरा होने का दावा कर रहा है। जबकि जिले के दर्जनों गरीब प्रतिदिन अपना राशनकार्ड बनवाने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। विभाग के जिम्मेदार यहां आने वाले फरियादियों को यह कहकर टरका देते हैं। अब ब्लाक के अधिकारी गांवों में बने राशनकार्ड के स्वामियों को अपात्र कर दें तो उनका राशनकार्ड बन सकता है। ऐसे में गरीब और राशन के लिए परेशान लोग जिला पूर्ति कार्यालय और अपने-अपने ब्लाक कार्यालयों के बीच चकरघन्नी बने हुए हैं। यही लोग गांव में घूम रहे दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं। वह दलाल इनसे एक राशन कार्ड बनवाने के तीन एक हजार से पांच सौ रुपये तक वसूल करते हैं। वह इन्हें राशन कार्ड बनवाकर भी दे देते हैं। ऐसे में सवाल उठाता है कि वह लोग कहां से राशन कार्ड बनवाकर देते हैं। इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी  का कहना है कि लक्ष्य पूरा हो चुका है। जरूरतमंद लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। इसके बाद दोबारा सर्वे कराकर अपात्र लोगों को पात्र गृहस्थी की सूची से हटाया जाएगा। इसके बाद ऐसे लोगों के राशनकार्ड बन सकेंगे।

No comments