प्राकृतिक सौंदर्य का एक नजारा उधवा प्रखंड की पतौड़ा झील



उधवा संवाददाता:-- हमारे देश और विदेश में झीलें और नदियां बहुत हैं। इन नदियों और झीलों में पानी की अठखेलियां करना बहुत अच्छा लगता है। इनके पास अगर थोड़ी देर बैठ लिया जाए, तो मन को शांति व सुकून भी मिल जाती है और वहीं अगर ये झीलें साफ़-सुथरी हों, तो सोने पर सुहागा वाली बात हो जाए। इस तरह ही कुछ नजारा देखने को मिलता हैं पतौड़ा झील की,जो झारखंड राज्य के साहिबगंज जिला के अंतर्गत उधवा प्रखंड के अंतर्गत अवस्थित हैं। उधवा झील पक्षी आश्रयणी पतौड़ा झील एवं बरहेल झील को मिलाकर  बनाया गया है।पतौड़ा झील लगभग 156 हेक्टेयर भूमि पर अवस्थित है ।दूसरी तरफ ब्रम्ह जमालपुर झील जो 410 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ब्रम्ह जमालपुर झील को बढ़ैल या बड़का झील भी कहते हैं। राजमहल की पहाड़ियों के बीच लगभग 5.65 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उधवा का पक्षी आश्रयणी है।दोनों झीलों को उदयनाला के माध्यम से गंगा नदी से साल भर पानी मिलता रहता है। शीत ऋतु और बरसात के मौसम में बढ़ैल और पतौड़ा झील आपस में जुड़ जाते हैं । कई प्रवासी ,अप्रवासी पक्षी और द्रुलभ  प्रजाति के पक्षी यहाँ जलक्रीड़ा करते हैं।मध्य एशिया से दिसंबर और मार्च के महीने में कई प्रवासी पक्षी आते हैं और इस झील की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। दोनों झील के प्राकृतिक सौंदर्य दृश्य अप्रवासी एवं प्रवासी पक्षियों को लुभाते हैं और वे स्वयं को यहाँ सुरक्षित महसूस करते हैं।शीत ऋतु में लगभग 80प्रजातियों के प्रवासी और अप्रवासी पक्षी यहाँ पाए जाते हैं और इनमें  से कई दुर्लभ प्रजाति के हैं। पतौड़ा झील झारखंड राज्य का एकमात्र पक्षी अभयारण्य और प्रवासी पक्षियों को आश्रय देने वाला प्राकृतिक घर है।झील के आस पास मुख्य रूप से स्पूनबिल, एकरेट, जगाना, किंगफिशर, गोल्डन ऑरियो ,बैकटेल,  ग्रेट आउल, हेरोइ्न् और स्ट्रोक जैसे प्रवासी पक्षियों के साथ बत्तख और कोरमोनेंटस काफी संख्या में यहाँ देखे जा सकते हैं। यहाँ जल सतह पर दिखाई देने वाले पक्षी में सामुद्रिक, जलमोर, चैती, पनकौवा,  डेबचिक, बानकर इत्यादि हैं। कीचड़ वाले किनारों पर टिटिहरी, बटान, खंजन, बगुला, आंजन, दाबिल, लकलक, और धोबैचा पक्षी दिखाई देते हैं। मैदान के पक्षियों में कबूतर, बगेरी, पतेना, गौरैया, मैना, चचरी और बुलबुल हैं। यहां मैना की 6 प्रजातियाँ दिखती हैं। शिकारी पक्षियों में कुररी , चील, मछलीमार, उकाब, बाज और गिद्ध प्रमुख हैं। घरेलू एवं खजूर पेड़ वाली बता सी कौडिल्ला, ड्राओंगो, नीलकंठ और ढेलहरा तोता आदि भी यहाँ दिखते हैं। यहाँ शीत ऋतु  के प्रवासी पक्षियों में धोमरा, मेरवा, छोटा बटान, टिमटिमा चुपका, आदि प्रमुख हैं।यहाँ पक्षियों का आगमन दिसम्बर से मार्च तक होता है। यहाँ स्थानीय प्रजाति के अलावा यूरोप व साइबेरिया से साइबेरियन पक्षी काफी संख्या में आते रहे हैं।शीत ऋतु के आगमन से ही यहाँ देश विदेश के पर्यटक काफी तादाद में भ्रमण करने आते हैं।

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