झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं के द्वारा मंत्री स्व हाजी हुसैन अंसारी के लिए मधुपुर गांधी चौक में की गई शोक सभा का आयोजन और दी गई श्रद्धांजलि



मधुपुर  6 अक्टूबर झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री स्व हाजी हुसैन अंसारी के याद में मधुपुर गांधी चौक में की गई  कार्यकर्ता के द्वारा शोक सभा का आयोजन इस मौके पर हाजी हुसैन अंसारी को दी गई श्रद्धांजलि इस मौके पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित हुए। जिसमें हाजी अब्दुल रशीद अंसारी,  झारखंड मुक्ति मोर्चा के नगर अध्यक्ष जयप्रकाश मंडल,  जिला पार्षद  सदस्य झामुमो  प्रखंड अध्यक्ष दिनेश्वर किस्कु, हाजी अलताफ हुसैन,कांगरू मरांडी, दिलीप चौधरी, मुख्तार अंसारी, शाकिर अंसारी, अंजुम हुसैन,  मीडिया प्रभारी  समीर आलम, दिलीप शाह, अरविंद यादव, नंदा यादव,वार्ड पार्षद अल्ताफ हुसैन, मोहरीक खान,शाहिद उर्फ फेकू, ओमप्रकाश, कन्हैया, मुरारी पांडे, अजय सिंह, जुनेद .शमशेर आलम,राम प्रवेश यादव, समेत सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।वहीं सबसे पहले बारी-बारी कार्यकर्ताओं ने गांधी चौक पर गांधीजी के तस्वीर पर माल्यार्पण किया इसके बाद मंत्री हाजी हुसेन अंसारी को श्रद्धांजलि दिया गया। इस मौके पर 2 मिनट का मौन रखा गया और मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के लिए दुआएं की गई। मौके पर झारखंड मुक्ति मोर्चा नगर अध्यक्ष प्रकाश मंडल ने मंत्री हाजी हुसैन अंसारी कि शख्सियत पर रोशनी डालते हुए कहा हाजी साहब इंसानियत का सबक पढ़ाने वाले  ऐसे इंसान थे जो हर एक इंसान की दिलों पर राज करते थे। आज वह हमारे बीच नहीं है मगर उनके दिए हुए सबक को कभी नहीं भुलाया जा सकता है उनकी यादें जीवन भर गुनगुनाते रहेगी। वह काफी नेक दिल इंसान थे यही कारण है कि हाजी साहब अल्पसंख्यकों का  हर दिल अजीज रहनुमा मैं शुमार किए जाते थे !मौके पर हाजी अब्दुल रशीदा अंसारी  मंत्री हाजी हुसैन अंसारी की शख्सियत पर रोशनी डालते हुए कहा उनकी शख्सियत एक अजीम शख्सियत थी  वह एक  जनप्रतिनिधि नहीं  नेक दिल,  नेक ख्याल  इंसाफ पसंद  और गरीबों के  हमदर्द  माने जाने वाले  शख्सियत का मालिक थे। यही कारण है कि मरहूम अंसारी अल्पसंख्यकों के सबसे अजीज रहनुमा माने जाते थे मैं उन के सबसे करीब साथी छोटे भाई की तरह था  वह हमेशा  अपने नेक सलाह से हमें नवाजते रहे। आज  वह हमारे बीच नहीं है  मगर  उनकी यादें  उनकी नेक सलाह हमारे बीच है  मैं उनकी यादें  कभी नहीं भूल सकता  अल्लाह ताला  से दुआ करता हूं  के  मरहूम हाजी साहब  को जन्नतुल फिरदोस में  करवट करवट  जगह फरमाए ! वही अंजुम हुसैन अपने शायराना अंदाज से कहा हम अकलियततो की शान यहां से चला गया! करके हमें उदास सदा वह चला गया! कैसे भुलाई जाए गी उस शक्स की भी याद! इंसान एक ऐसा भी था वह छोड़ कर चला गया! इसके अलावा कई लोगों ने भी मरहूम हाजी हुसैन अंसारी की शख्सियत पर रोशनी डाली!

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