*डॉ राम मनोहर लोहिया की 53 वीं पुण्यतिथि मनाया गया। मौके पर डॉक्टर लोहिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण कि गई



मधुपुर  12  अक्टूबर सोमवार को गांधी, जेपी, लोहिया सेनानी और स्थानीय  युवाओं के द्वारा डॉ राम मनोहर लोहिया की 53 वीं पुण्यतिथि मनाई गई।  डॉक्टर लोहिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया गया। समाज कर्मी घनश्याम ने कहा कि देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया जिनमें से एक थे राम मनोहर लोहिया। राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को फैजाबाद में हुआ था। उनके पिता हीरालाल पेशे से अध्यापक और  ह्रदय से सच्चे राष्ट्रभक्त थे।  उनके पिताजी गांधी के अनुयाई थे। जब वह गांधी जी से मिलने जाते तो राम मनोहर लोहिया को भी अपने साथ ले जाया करते थे। इसके कारण गांधी जी के विराट व्यक्तित्व का उन पर गहरा असर हुआ पिताजी के साथ 1918 में अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार शामिल हुए बनारस से इंटरमीडिएट और कोलकाता से स्नातक तक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए लंदन के स्थान पर बर्लिन का चुनाव किया था। उन्होंने 3 माह में जर्मन भाषा पर मजबूत पकड़ बना कर अपने प्रोफेसरों को चकित कर दिया था।  2 वर्षों में अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल कर लिया। 4 वर्षों के बाद वह जर्मनी से वापस भारत लौट आए। वह समाजवादी विचारधारा के पक्षधर थे। वह चाहते थे व्यक्ति व्यक्ति के बीच कोई मतभेद और दुराव नहीं रहे। सभी जन समान हो और सभी का कल्याण हो। वाह मानव मात्र को किसी देश का नहीं बल्कि विश्व का नागरिक मानते थे। जनता को वह जनतंत्र का निर्णायक मानते थे। डॉक्टर लोहिया अक्सर कहा करते थे कि उन पर केवल ढ़ाई आदमियों का प्रभाव रहा। एक मार्क्स का, एक गांधी का और आधा जवाहरलाल नेहरू का। वह कहा करते थे जिंदा कौमें 5 साल इंतजार नहीं करती। वर्ष 12 अक्टूबर 1967 को 57 वर्ष की आयु में डॉक्टर राममनोहर लोहिया का निधन हो गया। लोहिया के विचार आज ज्यादा प्रसांगिक है। मौके पर समाज कर्मी अरविंद कुमार, अस्तानंद झा,श्रीकिसुन, पंकज पीयुष, कुन्दन कुमार भगत, बाबूलाल, अबरार ताबिन्दा, विजय, नंदकिशोर शर्मा, महानंद, श्यामलाल,अक्षर, लिपि, सुभाष, दीपक मैसी समेत कई लोग उपस्थित थे । दूसरे सत्र में राजबाड़ी रोड स्थित सविता सभागार में काम का हो मौलिक अधिकार, स्वरोजगार और मधुपुर के युवा विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने वर्तमान में बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई और भुखमरी को लेकर गंभीर चर्चा की । स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए हर स्तर पर पहल करने पर जोर दिया गया!

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