केंद्र सरकार के द्वारा पारित कृषि विधेयक के खिलाफ कांग्रेस करेगी आंदोलन:-जवाहरलाल



देवघर: केंद्र की भाजपा सरकार तीन किसान विरोधी बिल पास करके हरित क्रांति को विफल करने की साजिश कर रही है। 1.किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) 2.किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन कृषि सेवा और 3.आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020, देश के किसानों और कृषि को नष्ट करने के लिए इस बिल का प्रारूप तैयार किया गया है। उक्त आशय की जानकारी  जिला प्रभारी जवाहरलाल महथा एवं जिला अध्यक्ष मुन्नम संजय ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता  के माध्यम से जानकारी दी। आगे  महथा ने कहा कि संघीय ढांचे का उल्लंघन कर संविधान को रौंदकर संसदीय प्रणाली को दरकिनार कर तथा बहुमत के आधार पर बाहुबली मोदी सरकार ने संसद के अंदर तीन काले कानूनों को जबरन तथा बगैर किसी चर्चा व राय मशवरे के पारित कर लिया है। यहां तक कि राज्यसभा में हर संसदीय प्रणाली व प्रजातंत्र को तार-तार कर ये काले कानून पारित किए गए। कांग्रेस पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों ने मत विभाजन की मांग की, जो हमारा संवैधानिक अधिकार है। 62 करोड़ किसान-मजदूर व 250 से अधिक किसान संगठन की जिंदगी से जुड़े काले कानूनों को संसद के परिसर के अंदर सिक्योरिटी गार्ड लगाकर,सांसदों के साथ धक्का-मुक्की कर बगैर किसी मत विभाजन के पारित कर लिया गया है।

संसद में संविधान का गला घोंटा जा रहा है और खेत खलियान में किसानों-मजदूरों की आजीविका का। जिन व्यक्तियों और ताकतों ने मोदी जी के निरंकुश राजतंत्र को स्थापित करने के लिए पूरे प्रजातंत्र को ही निलंबित कर रखा है, उनसे और कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती। संसद में 'वोट डिवीजन'के न्याय की आवाज को दबाकर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को खेती पर कब्जा करने के 'वॉइस वोट' का अनैतिक वरदान दिया गया है।

इन सबके बावजूद प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार देश को गुमराह करने और बरगलाने में लगी है। प्रधानमंत्री व भाजपा सरकार को किसानों-खेत मजदूरों-मंडी के आढ़तियों व मंडी मजदूरों, मुनीमों व कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों,व कृषि व्यवसाय से जुड़े करोड़ों लोगों के ऐतराज़ का सीधा जवाब देना चाहिए। ऐसे कानून से सब्जी मंडी व्यवस्था यानी एपीएमसी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।तो कृषि उपज खरीद प्रणाली भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। इससे सबसे बड़ा नुकसान किसान खेत मजदूर का होगा और सबसे बड़ा फायदा मुट्ठी भर पूंजी पतियों को। मोदी सरकार का दावा की अब किसान अपनी फसल देश में कहीं भी बेच सकता है, जो पूरी तरह से सफेद झूठ है।

ऐसे में 86% किसान अपनी उपज नजदीक अनाज मंडी, सब्जी मंडी के अलावा कहीं और ट्रांसपोर्ट कर न ले जा सकता हैं या बेच सकता है। मंडिया खत्म होते ही अनाज-सब्जी मंडी में काम करने वाले लाखों-करोड़ों मजदूरों, आढ़तियां,मुनीम, ढुलाई दारो,ट्रांसपोर्टरों,सेलर आदि की रोजी रोटी और आजीविका अपने आप खत्म हो जाएगी।अनाज सब्जी मंडी व्यवस्था खत्म होने के साथ ही प्रांतों की आय भी खत्म हो जाएगी। प्रांत मार्केट फीस व ग्रामीण विकास फंड के माध्यम से ग्रामीण अंचल का ढांचागत विकास करते हैं। वह खेती को प्रोत्साहन देते हैं।जो नहीं हो सकेगा।कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अध्यादेश की आड़ में मोदी सरकार असल में शांता कुमार कमिटी की रिपोर्ट लागू करना चाहती है।ताकि एफसीआई के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद ही ना करनी पड़े और सालाना 80000 से एक लाख करोड़ की बचत हो। अध्यादेश के माध्यम से किसान को ठेका प्रथा में फंसा कर उसे अपनी ही जमीन में मजदूर बना दिया जाएगा। यह नई जमीदारी प्रथा नहीं तो क्या है? यही नहीं कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से विवाद के समय गरीब किसान को बड़ी कंपनियों के साथ अदालत व अफसरशाही के रहमों करम पर छोड़ दिया गया है। इन सभी कारणों से आज पूरे देश के किसान मजदूर इस काले कानून का आंदोलन के माध्यम से विरोध कर रहे हैं। जिस पर केंद्र सरकार अंग्रेजों की भांति किसानों पर लाठीचार्ज कर रहे हैं। उन पर बर्बरता पूर्ण कार्यवाही कर रहे हैं। जो सरासर प्रजातंत्र की हत्या है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर केंद्र द्वारा पारित किसान विरोधी बिल के खिलाफ आंदोलनकारियों किसानों के साथ एकजुटता से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में पार्टी निम्न कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग करेगी।इस संदर्भ में आज 26 सितंबर को #SpeakUpForFarmers के माध्यम से सोशल मीडिया द्वारा विरोध दर्ज कर रही है।

28 सितंबर को प्रदेश मुख्यालयों पर गांधी प्रतिमा स्थल या विशिष्ट स्थानों से से राजभवन तक पैदल मार्च कर भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे।

 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के शुभ अवसर पर 'किसान मजदूर बचाओ दिवस' जिला मुख्यालय/ विधानसभा मुख्यालय पर धरना और प्रदर्शन करेगी।

10 अक्टूबर 2020 को राज्य स्तरीय किसानों के सहयोग से राज्य स्तर पर किसान सम्मेलन की जाएगी।

 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2020 तक हस्ताक्षर अभियान नुक्कड़ सभा के माध्यम से पंचायत स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा।जो जिला कांग्रेस एवं प्रदेश कांग्रेस के माध्यम से 14 नवंबर 2020 को पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस पर दो करोड़ किसानों का हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। चरणबद्ध तरीके से किसान हित में कांग्रेस पार्टी आंदोलन करेगी। मौके पर जिलाध्यक्ष मुन्नन संजय के अलावे प्रो.उदय प्रकाश, मीडिया प्रभारी दिनेश मंडल,राजेश कुमार ,बोकारो,डॉ गौरव, नगर अध्यक्ष रवि केसरी, कुमार विनायक, मकसूद आलम, राजकुमार शर्मा, बृजभूषण राम, जिप सदस्य महेंद्र यादव, अंकुर आनंद, विशाल वत्स, नाहिदा सुल्तान,राधा पाल,संतोष कुमार, आलोक कुमार, अधीर आदि मौजूद थे

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