लोक कल्याण की प्रेरणा देती है गुरुवाणी सरदार मांजा सिंह!



मधुपुर वाहेगुरू शिव मंदिर से प्राचीन ग्रंथ लेने पहुंचे सिख गुरु सरदार मांजा सिंह ने कहा कि आदि ग्रंथ सिख समुदाय का प्रमुख धर्म ग्रंथ है। मधुपुर वासियों ने 116 साल से अधिक समय तक इसे अपने ह्रदय में संभाल कर रखा इसके लिए सिख समुदाय मधुपुर वासियों का आजीवन आभारी बना रहेगा। हमारे प्राचीन  ग्रंथ को  गुरुग्रंथ साहिब जी भी कहते हैं। इसका संपादन सिख समुदाय के पांचवें गुरु अर्जुन देव ने किया। गुर ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाशन 30 अगस्त वर्ष 1604 को हरमंदिर साहिब अमृतसर में हुआ। 1705 में दमदमा साहिब को दशामेश  पिता गुरु गोविंद सिंह ने गुरु तेग बहादुर के 116 शब्द जोड़कर इसको पूर्ण किया। इसमें 1430 पृष्ठ हैं। गुरुमुखी लिपि में गुरुग्रंथ साहिब में मात्र सिख गुरुओं का उपदेश ही नहीं बल्कि 30 अन्य संतों और अलंग धर्म के मुस्लिम भक्तों की वाणी सम्मिलित है। इसमें जहां जयदेव जी और परमानंद जी जैसे ब्राह्मण भक्तों की वाणी है वही जाती पाती के आत्महंता भेदभाव से ग्रस्त तत्कालीन हिंदू समाज में हेय समझी जाने वाली जातियों के प्रतिनिधि दिव्य आत्माओं जैसे कबीर,  रविदास, नामदेव, सैण जी , साधना जी, देवा जी, धन्ना जी की वाणी सम्मिलित है। पांचों वक्त नमाज पढ़ने में विश्वास रखने वाले शेख फरीद के श्लोक भी गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं। इसकी भाषा की सरलता, सुबोधता और सटीकता जहां जनमानस को आकर्षित करती है वही संगीत के सुरों और 31 रागों के प्रयोग ने आध्यात्मिक उपदेशों को और भी मधुर बना दिया है। ईश्वर हमारे हृदय में है। गुरुवाणी लोक कल्याण की प्रेरणा देती है। मधुर व्यवहार और विनम्र शब्दों में प्रयोग द्वारा हृदय को जीतने की सिख गुरु ग्रंथ साहिब जी ने दी गई है!

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