सारठ नारकीय जीवन जीने को विवश ग्राम-पंचायत कैराबांक पंडित टोला के लोग आजादी के सात दशक बाद भी नहीं बना टोले की सड़क



सारठ : प्रखंड के ग्राम-पंचायत कैराबांक पंडित टोला के लोग आजादी के सात दशक बाद भी नारकीय जीवन जीने को विवश है और सरकारी योजनाओं के लाभ से पूरी तरह से वंचित है। उक्त टोले में एक दर्जन से अधिक वैसे परिवार हैं, जिनका घर जीर्ण-शीर्ण और जर्जर है, लेकिन फिर भी उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। वहीं टोले की सड़क वर्षों से कीचड़ युक्त रहने के बावजूद भी उसका निर्माण नहीं हो पाया है। ग्रामीण फाल्गुनी पंडित, मणि पंडित, सुगदेव पंडित, बिमल पंडित, कमल पंडित, बद्री पंडित, भथिया देवी, आंनदी देवी, सुकदेव पंडित आदि ने बताया कि टोले में जल सहिया शाहीना परवीन द्वारा करीब डेढ़ दर्जन शौचालय बनवाया जा रहा है, जिसमें लाभुक को महज नौ हजार रुपये ही दिया जा रहा है, जबकि सरकार द्वारा प्रति शौचालय 12 हजार देने का प्रावधान है। ऐसे में लाभुक द्वारा जैसे-तैसे शौचालय बनवाया जा रहा है जो उपयोगी नहीं हो सकता है। टोले के लोगों ने पंचायती राज व्यवस्था पर विरोध जताते हुए कहा कि उनलोगों ने प्रधानमंत्री आवास के लिए कई बार पंचायत की मुखिया नीलम देवी को आवेदन दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार के जगह नौ हजार देने की भी शिकायत की, लेकिन मुखिया ने शिकायत को भी गंभीरता से नहीं लिया। उक्त टोले में कई परिवार काफी गरीब हैं, लेकिन उन्हें राशन कार्ड भी नहीं मिला है, जबकि राशन कार्ड के कई बार मुखिया और बीडीओ को आवेदन दिया था। टोले में कई विधवा महिलायें हैं जो जिंदगी के अंतिम दौर से गुजर रही है, लेकिन फिर भी उन्हें विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया, जबकि सरकार सभी विधवाओं को पेंशन देने की घोषणा करते हैं।

क्या कहती हैं मुखिया : इस संदर्भ में कैराबांक मुखिया नीलम देवी का कहना है कि पंचायत के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं, जबकि मुखिया के पांच साल के कार्यकाल अब समाप्त होने को है। ऐसे में समझा जा सकता है कि पांच साल के कार्यकाल में भी यदि पंचायत के लोगों तक सरकारी योजनाएं नहीं पहुंची और लोग अपने वाजिब हक से वंचित ही रहे तो मुखिया का बयान को कोरा बकवास नहीं तो क्या समझा जाएगा। वहीं इस संदर्भ में बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने कहा कि यदि शौचालय निर्माण में जल सहिया द्वारा राशि की बंदरबांट की जा रही है तो ग्रामीण लिखित शिकायत करें, जांच कर दोषी पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी, वहीं कहा कि पीएम आवास के लिए खुद गांव जाकर जांच करेंगे और गृह विहीन परिवार को प्राथमिकता देकर उन्हें आवास योजना से जोड़ा जायेगा।

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