पितृ पक्ष की शुरुआत पितरों को पानी पिलाने की परंपरा


देवघर ब्यूरो रिपोर्ट।सोमवार 31अगस्त से पितृ पक्ष शुरू हो गया. यह पितृ पक्ष का पहला दिन है. पहले दिन अगस्त ऋषि को काश के पुष्प के साथ  कुश, तिल, फल के माध्यम से तर्पण कर पुर्वजों को प्रसन्न किया गया. यह सोमवार 31अगस्त प्रथम ऋषि तर्पण से शुरू होकर 17 सितम्बर गुरुवार तक चलेगा. इसमें पितर को कुश, तिल, फल के माध्यम से तर्पण कर पुर्वजों को प्रसन्न किया जाता है. यह कुल 18 दिनों तक चलेगा. 1 सितम्बर द्वितीय ऋषि तर्पण, 2 सितंबर पूर्णिमा श्राद्ध व तृतीय ऋषि तर्पण, 3 सितंबर प्रतिपदा श्राद्ध व तर्पण, 4 सितंबर द्वितीय श्राद्ध व तर्पण, 5  सितंबर तृतिया श्राद्ध व तर्पण, 6  सितंबर चतुर्थी श्राद्ध व तर्पण, 7 सितंबर पंचमी श्राद्ध व तर्पण, 8 सितंबर षष्ठी श्राद्ध व तर्पण, 9 सितंबर सप्तमी श्राद्ध व तर्पण, 10 सितंबर अष्टमी श्राद्ध व तर्पण, 11 सितंबर नवमी श्राद्ध व तर्पण, 12 सितंबर दशमी श्राद्ध व तर्पण, 13 सितंबर एकादशी श्राद्ध व तर्पण, 14 सितंबर द्वादशी श्राद्ध व तर्पण, 15 सितंबर त्रयोदशी श्राद्ध व तर्पण, 16 सितंबर चतुर्दशी श्राद्ध व तर्पण, 17 सितंबर सर्वपितृ,  अमावस्या श्राद्ध व तर्पण. इन सभी तर्पणों को छः भागों में बांटा  गया है. देव तर्पण, ऋषि तर्पण, दिव्य मानव तर्पण, दिव्य पितृ तर्पण, यम तर्पण, मनुष्य पितृ तर्पण के नाम से जाना जाता है.

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