चितरा कोलयरी के महप्रबंधक का तुगलकी फरमान रविवार का हाजिरी बंद



देवघर चितरा कोलियरी प्रबंधन द्वारा रविवार का हाजिरी बंद कर दिए जाने के कारण एसपी माइंस में कोयला कर्मियों एवं यूनियन प्रतिनिधियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एसपी माइंस चितरा कोलियरी के खून गांव में विस्थापन और पुनर्वास को लेकर प्रबंधन से विवाद चल रहा हैै। जिसके कारण खून गांव से उत्पादन बाधित हो गया था। इसी गुस्सा में महाप्रबंधक के आदेश पर शनिवार रात में अभिकर्ता द्वारा रविवार खदान बंद रखने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया गया। रविवार सुबह प्रथम पाली के श्रमिक जब काम के लिए ड्युटी पर आए तब उन्हें जानकारी मिली की संडे काम बंद रहेगा।उसके बाद सभी श्रमिक आक्रोशित हो गए और वर्कशॉप गेट पर जमा हो गए । मजदूर संडे चालू करने की मांग कर रहे थे जिसका नेतृत्व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सह केंद्रीय उपाध्यक्ष झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन शशांक शेखर भोक्ता ने किया। लगभग सभी यूनियन के प्रतिनिधि आंदोलन में सम्मिलित थे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री भोक्ता ने कहा की कोलियरी राष्ट्रीयकरण के बाद यह पहला मामला है जब रात के अंधेरे में रविवार बंद करने की सूचना बनाई गई और विभिन्न विभाग में चिपकाया गया  जोकि श्रम कानून के उलट है ।कोई भी नीतिगत फैसला लेने का अधिकार प्रबंधन को नहीं है ।उसके लिए (जेसीसी)संयुक्त सलाहकार समिति बनी हुई है ।जिसमें बैठक कर इस प्रकार के फैसले का निर्णय लिया जाता है । चितरा कोलियरी में मजदूरों के साथ अन्याय किया जा रहा है और यह मामला इसलिए हुआ क्योंकि प्रबंधन एसपी माइंस के खून गांव में पुनर्वास और विस्थापन की समस्या सुलझा नहीं पा रही है। और इसका दंश पूरे एसपी माइंस के 11सौ कर्मचारी को झेलना पड़ रहा है। एक खून गांव की समस्या को लेकर पूरा कोलियरी को बंद कर देना समझ से परे है।इस विषय में जोरदार आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो मुख्यालय से भी बात की जाएगी। कोलियरी विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध कराना या विस्थापन और पुनर्वास की व्यवस्था ट्रेड यूनियन का मामला नहीं है ।श्रम कानून में कहीं भी यह मामला आता ही नहीं है। प्रबंधन और रैयत जिनके जमीन का उपयोग करना हो दोनों के बीच कोल इंडिया के नियम के तहत वार्ता होती है ।इकरारनामा होता है और राज्य सरकार के माध्यम से जमीन अधिग्रहण किया जाता है। इसमें श्रमिक कर्मचारी या ट्रेड यूनियन क्या कर सकते हैं महाप्रबंधक और एजेंट द्वारा एक गांव के मामले को सुलझा नहीं पाने के कारण पूरे चितरा कोलियरी के वर्कर के साथ अन्याय करना कहीं से भी न्यायोचित नहीं है। सैकड़ों की संख्या में मजदूर वर्कशॉप गेट से गेस्ट हाउस होते हुए चितरा कोलियरी कार्यालय तक जुलूस के शक्ल में प्रबंधन विरोधी नारा लगाते हुए पहुंचे और भीड़ सभा में तब्दील हो गई। कई कोलियरी कर्मचारियों एवं संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कामगारों को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता ने कहा कि चितरा कोलियरी लगातार कोल इंडिया को मुनाफा देते आई है । ऐसे में इस प्रकार का रवैया प्रबंधन की हिन मानसिकता को दर्शाता है। चितरा कोलियरी का कोयला जामताड़ा रेलवे साइडिंग के माध्यम से केवल थर्मल पावर में जाता है। यहां कोई प्राइवेट रेलरेक आज तक नहीं लगा है। इसे लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता ने कहा कि स्थानीय कुछ लोभी नेताओं के चलते चितरा कोलियरी में समस्या उत्पन्न होती रहती है। जिनका एकमात्र लक्ष्य चितरा कोलियरी से अवैध उगाही करना है। श्रमिकों का अहित करके चितरा में लूट की दुकान चलने नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कड़े शब्दों में कहा की खून गांव के ग्रामीण अपना वाजिब हक मांग रहे हैं उसके साथ प्रबंधन मिल बैठकर वार्ता कर समस्या को सुलझाए और लोकतांत्रिक तरीके से समस्या का समाधान करें अगर प्रबंधन समझती है की इस प्रकार का तुगलकी फरमान जारी कर सभी श्रमिकों के साथ अन्याय कर जमीन ले लेंगे तो यह उनकी भूल होगी ।एसपीटी एक्ट में जमीन स्थानांतरण का मामला अन्य जगहों से अलग है। इसलिए प्रबंधन को सोच समझकर कदम उठाना चाहिए साथ ही उन्होंने कहा कि अगले रविवार से अगर नियमित रूप से पूर्व की भांति कोलियरी का कार्य नहीं चला तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

No comments